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सोमवार, 3 जून 2019

अनुवाद

नाऊ के दुकान म - अंतोन चेखव
AT THE BARBER'S - Anton Chekhov 

(छत्तीसगढ़ी म अनुवाद - कुबेर)


बिहिनिया, सात घला नइ बजे रिहिस अउ मकर कुजमिच बाइलॉस्टकेन के दुकान हर खुल गे रिहिस। नाऊ हर खुदे बसियहा, चीकट अउ चिरहा कपड़ा पहिरे रिहिस अउ तेइस साल के एक झन जवान के हजामत करे म भिड़े रिहिस। रोखे-रुखायबर कुछुच नइ रिहिस तभो ले वोहर अपन पसीना बोहावत रिहिस। एक जघा ल वोहर फरिया म पोछिस, दूसर जघा ल वोहर अपन नाखून म कुछ खुरचिस अउ एक ठन जुंआ ल धर के  कोठ म मसक के मारिस।

नाऊ के दुकान हर नानचुक, सकेला अउ गंदा रिहिस। लकड़ी के लट्ठा के दिवार मन म सूक्ति वाक्यवाले कागज अउ कोचवान के मामूली कपड़ा टंगाय रिहिस। दू ठन झेंझरहा, नान्हें-नान्हें खिड़की के बीच म एक ठन पतला,  टुटहा अउ चरमरा के खुलनेवाला दरवाजा रिहिस, नम हरियर खिड़की के ऊपर एक ठन घंटी टंगाय रिहिस जउन हर हालत रिहिस अउ बिना बजाय घला झझके के लाइक बाजत रिहिस। एक ठन दीवार म दरपन टंगाय रिहिस जेमा देखे ले चेहरा हर सब कोती ले टेड़गा-मेड़गा अउ बड़ा भद्दा दिखय। विही दरपन के आगू म बइठ के डाढ़ी बनाय के अउ चूंदी काटे के काम होय। नानचुक टेबुल कना बसियहा, चीकट अउ चिरहा कपड़ा पहिरे मकर कुजमिच बाइलॉस्टकेन हर खड़े रहय। टेबुल म सबो जिनिस - कंघी, कैची, उस्तरा, मेछा म लगाय के मोम के डब्बा, पावडर के डब्बा, पानी के सीसी, कोलोन इत्र अउ सच केहे जाय तब नाऊ दुकान के जम्मो जिनिस माढ़े रहय जेकर कीमत हर कुल मिला के पंद्रा कोपेक ले जादा नइ रिहिस होही।

बिगड़हा घंटी के किकियाय के आवज आइस अउ घाम म सुखा के साफ करे भेड़ के खाल के लांगबूट पहिरे एक झन आदमी हर दुकान म आइस। वोकर मुड़ी हर नरी के आवत ले महिलामन के ओढ़े के शाल म लपटाय रिहिस।

येहर मकर कुजमिच के गुरू एरास्ट इवानिच यागोदोव रिहिस। एक समय येहर कंन्सीस्ट्री (गिरिजाघर के न्यायालय म) म चैकीदार के काम करल मनखे हरे। अब वोहर रेड पाॅण्ड (लाल तरिया) के नजीक म रहिथे अउ तारा-कुची बनाय के लोहारी काम करथे।

’’मकरुस्का, मोर अच्छा दिन के प्यारा बच्चा!’’ वोहर मकर कुजमिच ल किहिस जउन हर वोकर ले नाराज रिहिस। दुनोझन एक दूसर ल चूमिन। यागोदोव हर अपन मुड़ी ले शाल ल निकालिस, अउ अपन आप ल संभाल के बइठ गिस। ’’लाल तरिया हर इहाँ ले बिकट दुरिहा हे,’’ वोहर आह भरिस, गला ल साफ करिस अउ किहिस, ’’उहाँ ले, लाल तरिया ले कलूगा गेट तक रेंगत आना कोनो ठट्ठा मजाक नो हे।’’

’’बने-बने।’’

’’का बताव मोर बेटा, कहिथे न - ’दुब्बर बर दू असाड़, मोला जर धर ले रिहिस।’’

’’मोला तो आपमन खबर नइ करेव।’’

’’हव, महीना भर ले खटिया धरे रेहेंव। मंयहर तो सोचत रेहेंव, मरि जाहूँ का। जर म बिक्कट तपे हंव। अब तो मोर चूंदीमन घला झर गिन हें। डाक्टर मन के कहना हे कि येला मुड़ा लेबे। उंकर कहना हे कि फेर घमघम ले नवा अउ मजबूत चूंदी जाग जाही। इही पाय के मंय हर सोचेव कि मकर कुजमिच कना चलना चाही, आखिर तोर ले जादा अच्छा संबंध मोर अउ काकर ले हे, वोहर सांवर घला बनाही अउ एको पइसा घला नइ लेही। घर ले तोर दुकान हर बिकट दुरिहा हे, पन वोकर ले का होथे? रेंगना घला जरूरी हे। विही पाय के आ गे हंव।’’

’’हाँ, खुसी-खुसी करहूँ। कृपा करके बइठव।’’ अपन गोड़ म छू के एक ठन कुरसी कोती इसारा करत मकर कुजमिच हर किहिस। 

यागोदोव हर खाल्हे म बइठ गिस अउ दरपन के प्रतिबिंब म अपन मुँहू  ल देख के बड़ा खुस हो गिस। दरपन के प्रतिबिंब म चेहरा हर टेड़गा-मेड़गा बने रहय, भदर्रा ओंठ, चेपटा नाक अउ आँखींमन हर माथा के ऊपर म। मकर कुज्मिच हर गिराहिक के खांद म सफेद चद्दर ओढ़ा दिस जउन म पींयर रंग के धब्बा बने रहय अउ कैंची धर के चूंदी ल काटे लगिस। 

’’मंय हर आपके चमड़ी ल साफ करे बर रोखहूँ’’ वोहर किहिस।

’’बने ढंग ले, ताकि मंय हर झक ले दिखंव, बम बरोबर। चूंदी मन सब घमघम ले हो जाहीं।’’

’’काकी हर कइसे हे?’’

’’बहुत सुदर ढंग ले हे। एक दिन पहिली वोहर जचकी करायबर प्रधान महिला के घर गे रिहिस। वोहर वोला एक रूबल दिस हे।’’

’’वाह! सही म, एक रूबल। ... अपन कान ल पकड़ के राख ...।’’

’’मंयहर पकढ़े हंव न ......तोर तीर मुड़ी रोखवाय के मोर इच्छा नइ रिहिस। ओय ... पिरावत हे! मोर चूंदी ल खींच झनी न।’’

’’कुछू नइ होय न। वोतका तो करेच परही, येमा हम आपके कोनो मदद नइ कर सकन। ... अउ एस्टावना हर कइसे हे?’’

’’मोर बेटी हर? वहू हर एकदम ठीक हे। आजकल वोहर खुसी म एकदम उछलत हे। पीछू हफ्ता, बुधवार के दिन हम शेखिन संग वोकर मंगनी कर देयेन। तंय हर काबर नइ आयेस?’’

कैंची के चलना बंद हो गिस। मकर कुज्मिच के हाथ हर ओरम गिस, घबरा के वोहर पूछिस, ’’काकर मंगनी कर देस?’’

’’अन्ना के।’’

’’वो कइसे? काकर संग।’’

’’शेखिन के संग। प्रोकोफी पेट्रोविच। ज्लाटवेटस्की लेन म वोकर काकी हर हाउसकीपर हे। वोला बेहद अच्छा सुभाव मिले हेे। पूछमत, हम सब बेहद खुस हन, भगवान के किरपा हे। हफ्ताभर म हम वोकर बिहाव कर देबोन। तंय हर जरूर आबे, हमला बहुत अच्छा मौका मिले हे।’’

’’पन ये सब कइसे होइस, इरास्ट इवानिच?’’ मकर कुजमिच हर अचरज खा के, उदास हो के अपन खांद ल उचकावत किहिस। ’’ये तो बिलकुल असंभव हे। काबर, अन्ना एस्टोवॉना .... मंय हर वोला मनेमन चाहथंव। मोर मन म वोकर खातिर प्रेम हे। ये सब कइसे होगिस।’’

’’कइसे, हम हर रिस्ता ले के गेन अउ वोकर मंगनी कर देन। वोहर एकदम अच्छा लड़का हे।’’

मकर कुजमिच के चेहरा म ठंडा पसीना चुचवा गिस। वोहर कैंची ल टेबुल म मढ़ाइस अउ अपन मुठा म अपन नाक ल रगड़े लगिस। ’’वोकर संग बिहाव करे के मंयहर सपना देखे रेहेंव’’ वोहर किहिस, ’’ये नइ हो सकय, इरास्ट इवानिच, मंय ... मंय हर वोला प्यार करथंव अउ वोला मंय हर अपन दिल के बात ल बताय घला रेहेंव ..... अउ काकी हर घला वादा करे रिहिस। मंय हर बाप के समान आपके इज्जत करत आवत हंव..... आपके सांवर बानाय के कभू मंय हर पइसा नइ लेयेंव। मंयहर हमेसा आपके ऊपर एहसान करेंव। जब मोर बाप हर मरिस तब तंयहर हमर सोफा ल अउ दस रूबल नगद लेय रेहेस जउन ल आज तक नइ लहुटायेस, सुरता हे कि नहीं?’’

’’सुरता! मंय बिलकुल सुरता करथंव। वोकर संग तोर जोड़ी कइसे खपही मकर कुज्मिच? वोकर संग फबे के लाइक तोर तीर का हे। न तो तोर तीर पइसा हे अउ न तोर कोनो इज्जत हे। तोर काम तो एकदम मामूली हे।’’

’’अउ शेखिन हर धनवान हे का?’’

’’शेखिन हर तो यूनियन के मेंबर हे। वोहर डेढ़ हजार ले जादा गिरवी रख के उधार बगराय हे। इही पाय के मोर बच्चा ........ अब ये बिसय म अउ जादा गोठियाना उचित नइ हे .......... अब येमा बिलकुल रद्दोबदल नइ हो सकय मकरुस्का। तंय हर अब दूसर लड़की खोजे के सुरू कर दे .... दुनिया हर अतका छोटे नइ हे। जल्दी मोर चूंदी ल कांट। काबर रुक गेस।’’

मकर कुजमिच हर एकदम चुप होगिस, कांटो तो खून नहीं। वोहर अपन जेब ले उरमाल निकालिस अउ रोय लगिस।

’’अरे! ये का ये?’’ इरास्ट इवानिच हर वोला धीरज बंधाइस। ’’छोड़ वो बात ल, जावन दे, डौकी मन समान रो झन। पहिली मोर मुड़ी ल मुड़ तहांले रोवत रहिबे। कैंची ल उठा।’’

मकर कुज्मिच हर कैंची ल उठाइस, मिनटभर वोकर डहर देखिस अउ कैंची ल फेर टेबुल म मढ़ा दिस। वोकर हाथ हर कांपत रिहिस। ’’मंयहर अभी नइ कांट सकंव,’’ वोहर किहिस, ’’अभी मंयहर ये नइ कर सकंव। मोर हाथ म अब ताकत नइ हे। मंय हर बेहद दुखी हंव। वहू हर बेहद दुखी होही। हम एक-दूसर ल प्यार करथन, मह दूनो एक-दूसर ले वादा करे रेहेन अउ निर्दयता पूर्वक जालिम मन हर हमला अलगा दिन। दूर हट जा, इरास्ट इवानिच,  मंय हर अब तोला फूटे आँखी घला नइ देख सकंव।’’ 

’’मकरुस्का, तब मंय हर काली आहूँ, तंय हर बांकी काम ल काली कर देबे।’’

’’ठीक हे।’’

’’तंयहर अपन आप ल संभाल। मंयहर काली बिहिनिया आहूँ।’’

एरास्ट इवानिच के मुड़ी हर आधा मुड़ाय रिहिस अउ वोकर कोनो अपराधीमन कस दिखत रिहिस। वोहर बड़ा भद्दा दिखत रिहिस, पन अब वोकर सामने अउ दूसर चारा नइ रिहिस। वोहर शाल म अपन मुड़ी ल लपेटिस अउ नाऊ दुकान ले निकल गिस। अब मकर कुजमिच हर बिलकुल अकेल्ला हो गिस अउ वोहर दंदर-दंदर के रोय लगिस।

दूसर दिन बिहिनियच ले एरास्ट इवानिच हर फेर धमक दिस। 

’’आखिर तंय हर का चाहथस?’’ मकर कुजमिच हर वोला सांत भाव ले पूछिस।

’’मकरुस्का, मोर चूंदी ल रोख दे। अभी आधा बांचे हे।’’

’’कृपा करके पइसा पहिली दे दे। पइसा झोंके बिना मंय हर नइ कांटंव’’

एरास्ट इवानिच हर कुछुच नइ किहिस अउ दुकान ले निकल गिस। वो दिन ले वोकर एक डहर के बाल हर लंबा अउ दूसर कोती के हर बुचवा हे। पइसा दे के बाल कटनवाना वोहर फिजूलखर्ची मानथे। अब वोहर बुचवा  बाल मन के बाढ़े के अगोरा म बइठे हे।

वोहर इही हालत म अपन बेटी के बिहाव म जम के नाचिस।
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रविवार, 2 जून 2019

अनुवाद

18. एक गूढ़ प्रवृत्ति
AN ENIGMATIC NATURE

(छत्तीसगढ़ी अनुवाद - कुबेर)

रेलगाड़ी के प्रथम श्रेणी डब्बा के लाल मखमलवाले सीट म एक झन सुंदर महिला अधलेटी हो के बइठे रिहिस। वोकर हाथ म एक ठन महँगा रोएँदार पंखा रिहिस जउन ल वोहर रहि-रहि के डोलवत रहय, वोकर नानचुक सुंदर नाक म कमानीदार चस्मा चढ़े रहय, वोकर छाती के हार ह समुद्र म तंउरत डोंगा कस खाल्हे-उप्पर होवत रहय। वोहर बहुत जादा उत्तेजित हालत म रिहिस।

वोकर आगू वाले सीट म बिसेस आयोग के प्रांतीय सचिव हर बइठे रिहिस। वोहर एक नवा, जवान लेखक रिहिस अउ समय-समय म आदर्स जीवन के लंबा-लंबा कहानी लिख-लिख के, जउन ल वोहर 'लघु उपन्यास’ कहय, प्रांत के सबले बड़े अखबार म छपवावत रहय। वोहर वो महिला के चेहरा ल जानबूझ के एक विसेसज्ञ के नजर ले, टकटकी लगाके देखत रहय। वोहर वोकर दुरलभ उत्तेजित चेहरा के गूढ़ प्रवृत्ति के एक-एक ठन रंग-ढंग के परख करत रिहिस अउ समझे के कोसिस करत रिहिस। वोला सब समझ म आ गिस, वोकर थाह ले डरिस। जउन हर वोकर आगू म लेटे रिहिस वोकर आत्मा, वोकर मनोवृत्ति,  वोला सब समझ म आ गिस।

’’ओह, मंयहर सब समझ गेंव, मंयहर आप ल अच्छा ढंग ले, आपके मन के भीतरी तह तक समझ गेंव।’’ बिसेस आयोग के प्रांतीस सचिव हर वोकर हाथ ल वोकर कंगन तीर चूमत किहिस, ’’आपके भावुक, द्रवित आत्मा हर ........ के चक्रव्यूह ल टोर के भागे के कोसिस करत हे, आपके मन म चलनेवाला कसमकस ह बड़ा भयानक अउ दुखदायी हे। पन आप धीरज मत खोवव, निरास झन होवव। जीत आपेच के होही, हाँ।’’

’’मोर बारे म लिख, वोल्देमार!’’ निरास हँसी हाँसत सुंदर महिला हर किहिस, ’’मोर जीवन बेहद संपन्न हे, सब साधन हे, सुख-सुविधा ले भरे पड़े हे, अतका सब होय के बावजूद मंयहर दुखी हंव। मंयहर दोस्तोवस्की के उपन्यास के दुखी आत्मा के समान हंव। मोर आत्मा के दुखित होय के रहस्य का हे, वोल्देमार, मोला बता। मोर आत्मा ल कब्जा करनेवाला प्रेत ला बाहिर निकाल। आपमन ह मनोवैज्ञानिक हरव। अभी संग म सफर करत घंटाभर घला नइ होय हे अउ आपमन मोर मन के थाह ले डरेव।’’

’’मोला अपन बारे म सब बात ल बतावव, मंयहर आप ल परेसान करहूँ, बतावव।’’

’’त सुन, मोर बाप हर क्लर्क जइसे छोटे पद म रिहिस। हिरदे ले वोहर बहुत अच्छा रिहिस, बहुत समझदार रिहिस, पन जमाना के रंगढंग - वोकर तीर-तखार के माहौल - आप समझ गेव न? ...... मंयहर अपन गरीब बाप ल कोनो दोस नइ देवत हंव, वोहर सराब पीइस, जुआ खेलिस, घूस लिस। मोर माँ रिहिस - पन वो का कहितिस? गरीबी अउ रोज के रोटी के संघर्ष - वोकर आत्मा ल कमजोर बना दे रिहिस। आह, ये सब ल सुरता करे बर मोला मजबूर झन कर। मोला अपन भविस्य खुद बनाना रिहिस। बोर्डिंग स्कूल के राक्षसी पढ़ाई के बारे म आप जानथव, मूर्खतापूर्ण उपन्यास मन के पढ़ाई, जवान होवत उमर के पहिली गलती, मन म प्यार के पहिली कसक। जीवन के अस्थिरता अउ जीवन म आत्मविस्वास खोय के दरद, चाहे कोनो होय, ये सब बहुत भयानक रिहिस। आह! आप लेखक हव। आप हमर जइसे महिला के दुख ल बने ढंग ले समझथव। आप समझ सकथव। आपेआप मोर सुभाव म उलझाव आ गिस। मोला खुसी के तलास रिहिस - पन वो खुसी मोला मिलिस? मोला अपन आत्मा के सुतंत्रता के चाह रिहिस! हाँ इही रद्दा म मोला अपन जीवन के खुसी दिखिस।’’

’’आप एक पुण्यात्मा हरव।’’ लेखक हर टुड़बुड़ाइस अउ कंगन तीर वोकर हाथ ल चूम लिस। मंय हर आप ल चूमत नइ हंव, भलुक ये हर दुखी मानवता खातिर हरे। आप ल रस्कोलनिकोव अउ वोकर चुंबन के सुरता हे?’’

’’ओह, वोल्देमार, मंय हर गौरव हासिल करे खातिर तरसत हंव। यश, सफलता अउ अइसन चीज हर विनीतभाव ल काबर प्रभावित करथे? हर व्यवहार सामान्य ले ऊपर। मंयहर कुछ असाधारण चीज प्राप्त करे खातिर तरसत हंव, एक सामान्य महिला ले बहुत ऊपर के उपलब्धि हासिल करे के कोसिस करेंव। अउ तब .. अउ तब, तब कोनो न कोनो मोर रस्ता म आ गिस। एक झन बुढ़वा जनरल, बहुत अच्छा आदमी। मोला समझे के कोसिस करव,वोल्देमार! येला मोर आत्म बलिदान अउ त्याग के रूप म आप देखव। येकर ले जादा मंय अउ कुछू नइ कर सकत रेहेंव। मंय हर वोकर परिवार ल सुखी बना के अच्छा जीवन देय के प्रयास करेंव। मंय हर अउ कतका सहितेंव, कतका विद्रोह करतेंव, वो सब मोर खातिर घिनौना रिहिस, जउन वोकर संग रेहेंव। हालाकि मंयहर वोकर प्रति ईमानदार रेहेंव। वहू हर अपन डहर ले ईमानदारी ले कोसिस करिस। कुछ पल.... बड़ा भयानक होथे, .. पन मोर मन म ये विचार रिहिस कि बुढ़वा के मौत होय के बाद मंय हर अपन मन के मालिक हो जाहंव। मनपसंद आदमी ल अपन आप ल सौंप के मंय खुस हो जाहंव। एक आदमी अइसन हे, वोल्डेमार, सच म। हे उहाँ।’’

वो सुंदर महिला हर अपन हाथ के पंखा ल रटठा के घुमाय लगिस। वोहर रोनहू हो गिस। आगू केहे के सुरू करिस, ’’अउ आखिर म एक दिन वो बुढ़वा हर मर गिस। वोहर मोर खातिर कुछ छोड़ के मरिस। मंय हर अगास म उड़त चिरईया कस बिलकुल सुतंत्र हो गेंव। अब मोर बर खुस होय के समय हे, हे न वोल्देमार? खुसी हर मोर खिड़की कोती ले दस्तक देवत हे, वोला बस भीतर आवन देना हे ... पन वोल्देमार, सुन, मंय हर आप ल उलझावत हंव। अब मोर मरजी हे कि मंय हर अपन आप ल वो आदमी के हाथ म सौंपंव, जेकर ले मंयहर प्यार करथंव, वोकर जीवन संगिनी बन सकंव, वोकर मदद कर सकंव, वोकर आदर्श ल निभा सकंव, खुसी के खातिर, आराम के खातिर ... पन हमर जीवन हर कतका निरासाजनक, कतका कठोर, कतका उबाऊ अउ कतका मूखतापूर्ण हे वोल्डेमार। मंय हर मनहूस हंव, मनहूस, करमछंडी। अब मोर रास्ता म अउ बाधा आ गे हे। मोला लगथे कि खुसी हर अब मोर ले अउ जादा दुरिहा गिस हे, बहुत दुरिहा गिस हे। हाय, जीवन म कतका दुख अउ पीर हे। कास, कि मोर दुख ल आप समझ सकतेव।’’

’’पन आपके रास्ता म अब का अड़चन आ गिस हे? मंय आप से बिनती करथंव, मोला बतावव। कोन से बाधा हे?’’

’’एक झन दूसरा बुढ़वा जनरल, एकदम से .......’’

टुटहा पंखा म वोकर सुंदर सूरत हर ढंकाय रिहिस पन कतका ढंकाही। लेखक हर मुठा बाध के अपन बिचार ल झकझोरिस ....... मनोविज्ञान के ज्ञाता के भौंह हर सकला गिस अउ वोकर बिचार मन हर हवा म उड़ा गिस। 

रेलगाड़ी के इंजिन हर सीटी बजावत सरके लगिस अउ खिड़की के परदा मन के रंग हर बूड़त सूरज के आभा म लाल हो गिस।
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टीप:- 
1 मानव आत्मा के संताप अउ दुख - रूस के महान उपन्यासकार फ्योदोर दोस्तोएव्स्की के महान उपन्यास ’अपराध अउ दंड’ के प्रमुख विसय।
2. फ्योदोर दोस्तोएव्स्की के महान उपन्यास ’अपराध अउ दंड’ के प्रमुख पात्र रस्कोलनिकोव के कथन डहर संकेत।
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शनिवार, 1 जून 2019

अनुवाद

खुसी - अंतोन चेखव
JOY -  Anton Chekhov

(छत्तीसगढ़ी म अनुवाद - कुबेर)

रात के बारा बजे रिहिस।

मित्या कुलड्रोव हर खुसी के मारे नाचत-कूदत अपन माता-पिता के खोली कोती दंउड़िस। वोकर चुदी-मुड़ी के ठिकाना नइ रिहिस। वो हर ये खोली ले वो खोली दंउड़े लगिस। वोकर माता-पितामन पहिलिच सुत गे रिहिन। बहिनी हर कोनो उपन्यास के आखिरी पन्ना ल पढ़त अपन पलंग म ढलगे रिहिस। संग म स्कूल जवइया भाई तको हर सुत गे रिहिस।

’’कहाँ ले आवत हस?’’ वोकर माता-पितामन चकित हो के चिल्लाइन। ’’बात का हे?’’

’’ओहो! झन पूछव! मंयहर सोचे तको नइ रेहेंव; सपना म घला नइ सोचे रेहेंव। ये .... येहर एकदम ठीक होय हे, विस्वास नइ होवत हे।’’

मित्या हर जोरदार हाँसिस अउ आरामी कुर्सी म धड़ाम ले बइठ गिस। वोहर अतका खुस रिहिस कि खड़ा घला नइ हो पावत रिहिस। ’’सुन के आपमन ल बिलकुल बिसवास नइ होही। आप सोच घला नइ सकव।’’

वोकर बहिनी हर चद्दर ल फेंक के झकनका के उठिस अउ आइस। संग म स्कूल पइया भाई घला हर उठ के आ गिस। 

’’बात का हे? पहिली तो कभू अइसन नइ करत रेहेस।’’

’’वो ये पाय के माँ, कि आज मंयहर बेहद खुस हंव। का तोला पता हे कि अब पूरा रूस हर मोला जान गिस। पूरा रूस हर। फकत तुहींचमन नइ जानव कि रूस म दिमित्री कुलड्रोव नाम के एक झन पंजीकरण क्लर्क हे। आज पूरा रूस हर जान गिस। मम्मी, ओहो, हे भगवान।’’

मित्या हर उछल के खड़े हो गिस। खोलीमन म  खाल्हे-ऊपर दँउड़े लगिस अउ आ के फेर बइठ गिस।

’’आखिर होइस का? ढंग से समझा के तो बता।’’

’’आपमन बिलकुल जंगली जानवर कस रहिथव, अखबार थोरको नइ पढ़व, अउ अखबार म का छपे हे वोकरो ऊपर धियान नइ देवव, अउ अखबार म बहुत कुछ रोचक बात छपे रहिथे। कहाँ, का-का होवत हे, सब तुरत पता चल जाथे, कुछू नइ छिप सके। आज मंय कतका खुस हंव! हे भगवान! जनता हर विही ल जानथे, जेकर नाव हर अखबार म छपथे, अउ आज मोर नाव हर छपे हे।’’

’’का मतलब?’’कहाँ?’’

बाप के मुँहू हर उतर गिस। माँ हर पवित्र फोटू डहर देख के क्रास के चिनहा बनाइस। स्कूलवाले भाई हर जइसन पहिरे रिहिस, छोटकुन कुरता, वइसनेच अपन बिस्तर ले कूद के भाई कना आ गिस।

’’हाँ! मोर नाव छपे हे! अब पूरा रूस हर मोला जानथे। माँ! यादगार बनायबर ये अखबार ल संभाल के रख ले। जब-जब सुरता आही, निकाल के पढ़ लेय करबोन। ये देख।’’

मित्या हर अपन जेब ले अखबार निकालिस अउ अपन बाप के हाथ म दे दिस अउ नीला पेंसिल ले लगे निसान कोती अंगरी ले इसारा करत किहिस, ’’येला पढ़।’’

बाप हर आँखी म चस्मा चढ़ाइस।

’’येला पढ़ न।’’

माँ हर फेर पवित्र फोटू डहर देख के क्रास के चिनहा बनाइस। पापा ह खखार के गला साफ करिस अउ पढ़े के सुरू करिस, ’’29 दिसंबर के रात के ग्यारा बजे दिमित्री कुलड्रोव नाम के एक झन पंजीकरण क्लर्क हर .........।’’

’’देखे, देखे, आगू पढ़ न।’’

’’ ...... दिमित्री कुलड्रोव नाम के एक झन पंजीकरण क्लर्क हर लिटिल ब्रोननिया म कोजीहिन के इमारत ले बीयर पी के नसा के हालत म आवत रिहिस ......।

’’वो मिही हरंव, मंय अउ शिमोन पेट्रोविच। बिलकुल जस के तस छपे हे। आगू पढ़व! सुनव।’’

’’ ...... नसा के हालत म आवत रिहिस अउ लड़भड़ा के इवान ड्रॉटोव नाम के युहनोव्स्की जिला के दुरिकिनो गांव के एक किसान स्लेज चालक के घोड़ा के खाल्हे गिर गिस। घोड़ा हर डर के मारे कुलड्रोव ला खूंदत, अउ स्लेज गाड़ी हर वोला रेतत निकल गिस। संग म स्लेज सवार, मास्को के दुसरा व्यापारी संघ के स्टीफन लुकोव हर घला चपका गिस। मुहल्लावाले मन उठाइन। कुलड्रोव ल, जउन हर बेहोस हो गे रिहिस, पहिली पुलिस थाना लेगे गिस जिहाँ डाॅक्टर मन वोकर जांच करिन। वोकर मुड़ी के पीछू कोती चोट के निसान पाये गिस .....’’

’’ये बिलकुल मामूली चोट हरे पापा, बाकी ल पढ़ न।’’

’’....... वोकर मुड़ी के पीछू कोती चोट के निसान पाये गिस जउन हर जादा गंभीर नइ निकलिस। कानून के अनुसार घटना के रिपोट लिखा दे गे हे। घायलमन ल चिकित्सा सुविधा प्रदान कराय गिस ........’’

’’वोमन मोला ठंडा पानी म घाव के सेंकाई करे बर केहे हे। अब तंय पढ़ डरेस न? ओह, सही बात हरे निही। रूस भर के आदमीमन मोला जान गिन। अब अखबार ल मोला दे दे।’’

मित्या हर अखबार ल अपन कब्जा म ले लिस अउ वोला मोड़मुड़ा के अपन खीसा म घर लिस।

’’अब मंय हर मकारोव्स कना जाहूँ अउ वहू ल येला देखाहूँ।’’ .....  इवानित्सकिस, नटास्या इवानोव्ना, अउ अनीसिम वासिलीच ल घला देखाहूँ  ...... गुड बाय।’’

मित्या हर टोपी पहिरिस, वोकर कलगी ल सुधारिस अउ जानामानो कोनो लड़ाई जीत के आय होय, मारे खुसी के गली कोती भाग गिस।
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टीप:- पंजीकरण क्लर्क हर रूस म सबले छोटे सरकार पद होथे।

गुरुवार, 30 मई 2019

अनुवाद

एक मुरदा आदमी - एंटोन चेखव 
A DEAD BODY - Anton Chekhov

(अंतोन चेखव के कहानी "अ डेउ बाॅडी’’ के छत्तीसगढ़ी अनुवाद - कुबेर)

अगस्त महीना के रात रिहिस। खेत कोती ले धीरे-धरे धुँधरा छावत गिस अउ बात कहत आँखी के आगू हर चीज  ऊपर परदा छा गिस। चंदा के अंजोर म धुँधरा हर पलभर म जइसे सफेद दीवाल म चारों डहर सांत अउ सीमा रहित समुद्र के चित्र बना दिस। बेहद ठंडा अउ नम हवा चले लगिस। बिहिनया होय म बहुत देर रिहिस। जंगल के तीरेतीर गुजरनेवाला सड़क ले दू कदम दुरिहा टिमिक-टिमिक आगी जलत रिहिस। नानचुक मदार के पेड़ खाल्हे मुड़ ले पांव तक सफेद लिनेन कपड़ा म ढंकाय एक मरे सरीर परे रिहिस। वोकर छाती मेर लकड़ी के ताबूत परे रिहिस। लास के बाजू सड़क म दू झन किसान मन मजबूरी म चौकीदारी करत  बइठे रिहिन। एक झन हर जवान अउ ऊँचपूर रिहिस जेकर बड़े-बड़े मेछा अउ बड़े-बड़े भौंह रिहिस अउ जउन हर भेड़ के खाल के चिथरहा पनही पहिरे रिहिस, गिल्ला कांदी म गोड़ लमा के बइठे रिहिस, अउ सब ल छोड़ के खिसके के कोसिस करत रिहिस। वोहर अपन लंबा घेंच ल टेड़गा करके, एक ठन टेड़गा लकड़ी के टुकड़ा ल चम्मस बनाके अंगीठी ल कोचकत, नाक डहर ले जोर-जोर से सांस लेवत रहय। दूसर किसान ह मरियल कस ठिगना डोकरा रिहिस जेकर मुँहू म चेचक के दाग, ठाड़-ठाड़ मेछा अउ बोकरा के दाढ़ी कस डाढ़ी रिहिस, अपन दुनों माड़ी ल पोटार के हालेडुले बिना अंगीठी डहर टकटकी लगा के देखत बइठे रिहिस। दुनों झन के बीच म नानचुक अंगीठी हर उंकर मुँहू  म लाल अंजोर बिगरावत टिमिक-टिमिक बरत रिहिस। चारों मुड़ा सननाटा पसरे रिहिस। खाली चाकू ले लकड़ी ल रेते के अउ बरत लकड़ी के चटके के आवाज आवत रिहिस। 

’’का तंय ह सुतत नइ हस सियोमा .....’’ जवान टूरा हर पूछिस।

’’मंय हर ..... मंय हर नइ सुतत हंव .......।’’ बोकरा डाढ़ीवाले हर झकनका के किहिस।

’’तब ठीक हे। इहाँ अकेल्ला बइठना भयानक हे, कोनो घला डर्रा जाही। तब कुछू काहीं सुनावस नहीं सियोमा।’’

’’सिमोस्का! तंय हर बड़ बिचित्र आदमी हस। दूसर होतिस तब हाँसतिस-गोठियातिस, गाना गातिस, कहानी सुनातिस, पन तंय ... तोला तो कुछुच नइ आवय। तंय हर तो बाड़ी-बखरी के बिजूका कस अंगीठी डहर देखत गोल-गोल आँखीं घुमावत बइठे भर हस। तोला कुछुच नइ आवय ........ गोठियाथस त अइसे लागथे कि तंय हर डर के मारे कांपत हस। मंय हर कहि सकथंव कि तंय हर भले पचास बरिस के हो गे हस पन तोर बुद्धि हर नानचुक लइका केे दिमाग ले घला गे-बीते हे। तंयहर एकदम बुद्धू कस हस, ये बात के तोला दुख नइ होवय?’’

’’मोला छिमा कर।’’ बोकरा दाढ़ीवाले हर हतास हो के किहिस।

’’अउ मोला तोर मूर्खता ल देख के तोर ऊपर तरस आवत हे, तंय ठीकेच कहत हस। तोर सुभाव हर बहुत अच्छा हे, तंय बिलकुल सीधा किसान हस अउ परेसानी के बात ये हे कि तोर दिमाग म भूया भराय हे। तंय हर अपन आप म कुछू समझदारी पैदा कर, भगवान हर तोर संग बड़ा जुलुम करे हे कि तोला थोरको घला मझदारी नइ देय हे। तोला बने कोसिस करना चाही,  सियोमा ......... तंयहर हर बात ल बने ढंग ले सुनेकर, बने समझेकर अउ बने सोच-समझ के गोठियाय कर ........  खूब सोचेकर, खूब सोचेकर। कोनो सब्द के तोला समझ नइ हे, हर सब्द ल बने सुनेकर, अउ दिमाग लगा के समझेकर कि एकर मतलब का होथे अउ येला कब बोले जाथे। समझ म आइस? बने कोसिस करे कर। अगर तंयहर कोनो बात के मतलब नइ समझ सकबे तब तंयहर बुद्धू बनबे अउ मरे के दिन तोर कोनो इज्जत नइ होही।’’

बातचीत चलत रिहिस तभे अचानक जंगल डहर ले ककरो कराहे हे आवाज सुनाई परिस। डारा-पाना म सरसराहट के आवाज, जइसे कि कोनो जिनिस ह रूख के ऊपर ले टूटके जमीन म गिरिस होय। आवाज हर एक घांव अउ गूंजिस। जवान हर चिल्ला के अपन संगवारी डहर देखिस।

’’कोनो घुघवा हरे छोटे चिरई के सिकार करिस होही।’’  सियोमा हर धीरे से किहिस।

’’कइसे, सियोमा, ये हर चिरईमन के गरम देस कोती जाय के समय हरे।’’

’’बिलकुल, इहिच समय।’’

’’इहाँ बिहिनिया हर कतका ठंडा हे। ये हर जुन्ना रिवाज हरे। सारस मन हर ठंडा परानी होथंय। ठंड ल देख, अतका ठंड म सारसमन के मौत हो जाथे। मंयहर तो कोनो सारस नो हंव, तभो ले ठंड के मारे अकड़े परत हंव ............... अंगीठी म लकड़ी डार।’’

सियोमा हर उठिस अउ अंधियार जंगल म जा के गायब हो गिस। वोहर झाड़ी म जा के सुक्खा लकड़ी टोरे लगिस। वोकर संगवारी हर लकड़ी टोरे के आवाज ल सुनत डर के मारे आँखी मूंद के बइठे रिहिस। सियोमा हर काबाभर सुक्खा लकड़ी धर के आइस अउ अंगीठी म डारदिस। अंगीठी हर जइसे लकड़ी के भूखा रिहिस होही, सुक्खा डारामन ल तुरते चाटे लगिस अउ भभक गिस। सडक म, लास के सफेद लिनेन के कपड़ा म अउ उंकर चेहरा म ललहूँ अंजोर बिगर गिस, लास के हाथ-पांवमन अउ ताबूत  हर दिखे लगिस। चैकीदार मन एकदम चुप हो गिन। जवान हर डर अउ घबराहट के मरे अपन नरी ल गड़िया लिस। बोकरा डाढ़ीवाले हर पहिलिच जइसे बिना हाले-डोले बइठे रिहिस अउ अंगीठी कोती एकटक देखतरिहिस।

’’सही हे! जउन सियोन से परेम नइ करय, प्रभु के द्वारा वोकर निंदा करे जाही।’’ रात के सननाटा म वोमन ल मद्धिम आवाज म ये अस्वाभाविक गीत सुनाई परिस। फेर धीरे-धीरे पदचाप के आवाज सुनई दिस, अउ एक झन बुटरा आदमी जउन हर साधूमन के समान छोटकुन कैसाक अउ लंबा-चैड़ा टोपा पहिरे रिहिस, वोकर खांद म बटुआ टंगाय रिहिस, अंगीठी के ललहूँ अंजोर म सड़क म धीरे-धीरे छंइहा कस आवत दिखिस।

’’हे ईश्वर! हे पवित्र माता! तोर किरपा से सब अच्छा हो गिस।’’ वो मनखे के आकार हर करकस आवज म किहिस। ’’बीच जंगल अउ घोर अंधियार म अंगीठी देख के मोर आत्मा हर परसन्न हो गिस ............. सबले पहिली, मंय हर सोचेंव कि तूमन हर घोड़ा चराइया होहू, फेर सोचेंव कि अइसे नइ हो सकय काबर कि कहीं कोनो घोड़ा दिखत नइ हे, तब मंय हर सोचेंव कि कोनो चोर होहू, अउ ये सोच के डर्रा गेंव कि कहीं तुमन लाजर, धनवान आदमी ल लूटे खातिर लुका के बइठे लुटेरा झन होव। फेर सोचेंव कि जिप्सी मन मूर्ति ल परसन्न करे खातिर बलि चढ़ावत होहीं। अउ मोर आत्मा हर खुसी के मारे उछल गिस। फेर मंय हर मनेमन केहेंव, फिओडोसी, ईश्वर के सेवक, शहीद मन के ताज जीत अउ पतंगा बन के, पंख खोल के परकास म नाच। अब मय हर इहाँ, आपमन के सम्मुख खड़े हंव। आपमन न तो कोनो चोर हरव अउ न कोनो डाकू। ईश्वर आपमन ल सांति दे।’’

’’नमस्कार।’’

’’अच्छा, पुरातनपंथी संगी हो, इहाँ ले मकुहिंस्की ब्रिकार्ड्स जाय के रद्दा तूमन जानथव का?’’

’’वो तो इहाँ ले एकदम नजीक हे। आप ये सड़क ल धर के सोझ चले जाव। डेढ़ मील चले के बाद आप ल हमर गाँव, अननोवा मिलही। फादर! गाँव ले आप जेवनी बाजू मुड़क जाहू अउ नदिया के तीरेतीर जाहू। अनानोव ले दू मील चले के बाद आप ल मकुहिंस्की ब्रिकार्ड्स मिल जाही।’’

’’ईश्वर तुंहर भला करय। पन तुमन इहाँ बइठे काबर हव?’’

’’हमन इहाँ चौकीदारी करत बइठे हन। वोती देखव, लहस परे हे........।’’

’’का? का परे हे? हे पवित्र माँ!’’

तीर्थयात्री ह लिनेन के सफेद कपड़ा अउ ताबूत ल देखिस, अउ वोहर अतका हिंसक हो गिस कि वोकर गोड़ मन हर उछले लगिस। ये अनचाहा दृस्य ल देख के वोकर दिमाग हर काम करना बंद कर दिस। कभू वोहर पगलामन सरीख हुड़दंग करे लगे त कभू मुँह फार के आँखी ल नटेर के एके जगह खड़े रहय। तीन मिनट बाद वो हर एकदम चुप हो गिस जइसे कि वोला अपन आँखी देखल ऊपर बिसवास नइ होवत होय अउ तब वोहर बड़बड़ाना सुरू कर दिस, ’’हे ईश्वर! हे होली मदर। मंय तो अपन रद्दा म जावत रेहेंव, ककरो कोनो बिगाड़ नइ करेंव, फेर अचानक ये दुख काबर।

’’आप कोन हरव?’’ जवान हर पादरी लेे पूछिस।

’’न ... नहीं ... मंय हर एक मठ ले दूसर मठ जावत रेहेंव। का तंय हर जानथस? मिहिरन पोलिकारपिच ल, जउन हर ब्रिकार्ड के फोरमैन हरे? हाँ हाँ, मंय हर वोकर भतीजा हरंव ......... तुमन इहाँ का करत हव, हे ईश्वर! तुमन इहाँ का कबर हव?’’

’’हमन इहाँ निगरानी करत हन .... हमन ल इही काम बताय गे हे।’’

’’हाँ, हाँ ...........’’, वो आदमी हर अपन हाथ ल अपन आँखी मन म फेर के फुसफुसा के किहिस, ’’ अउ ये मरनेवाला हर कहाँ ले आय रिहिस?’’

’’ ये हर अनजान आदमी हरे।’’

’’इही हर जीवन हरे। पन मंयहर हंव न ..... अ..र...भाई हो, अपन काम करव ...... लगथे, मंयहर बिदक गे हंव। मंयहर सब चीज ले जादा मुरदा ले डर्राथंव मोर प्रिय दोस्त। ये सब दिखावा हरे, जब ये आदमी हर जीयत रिहिस, येला कोनो घेपत नइ रिहिस होही अउ जब येहर मर गे हे, कोनो भ्रस्टाचारी मन कस येकर आगू हम कांप जाथन जइसे कि कोनो जनरल या पादरी के आगू आदमी मन कांप जाथें ..इहीहर जीवन आय; का येकर हत्या होय हे कि अउ कुछ?’’

’’भगवान जाने, हो सकथे हत्या होय होही, या हो सकथे ये हर खुदे मर गिस होही।’’

’’हाँ ..हाँ .. भई हो, ये बात ल कोनहर जानही? शायद येकर आत्मा हर सरग म खुसी म नाचत-कूदत होही।’’

’’वोकर आत्माहर अभी इहेंच हे, अपन सरीर के नजीक,’’ जवान आदमीहर किहिस, ’’तीन दिन तक सरीर ल छोड़के येहर कहूँ नइ जाय।’’

’’हूँ .. ठीक! अब रात कतका ठंडा हो गे हे! ककरो घला दांत क किटकिटाय लगही। इहीपाय के मोला सोझ अपन रद्दा नापना चाही।’’

’’गाँव पहुँचे के बादेच आप जेवनी मुडकहू अउ नदिया के तीरे-तीरे जाहू।’’

’’नदिया के तीरे-तीर ...... पक्का न ...... तब मंयहर इहाँ काबर खड़े हंव? जरूर चलना चाही। अच्छा भाई हो! अलविदा।’’

कैसाकवाले वो आदमी हर मुस्किल ले पाँच कदम रेंगिस होही अउ रुक गिस, ’’कफन-दफन खातिर मंयहर एक कोपेक के सिक्का डारे बर भुला गे रेहेंव,’’ वोहर किहिस, ’’अच्छा, पुरातनपंथी संगी हो, का मंयहर रकम दे सकथंव?’’

’’येकर बारे म हमर ले जादा आप ल जानकारी  होना चाही। आप ये मठ ले वो मठ घूमत रहिथव। कहूँ येहर सुभाविक मौत मरे होही तब येहर वोकर आत्मा के भलाई म जाही; अउ कहूँ येहर आत्महत्या करे होही तब तो येहर पाप होही।

’’बिलकुल सही ..... अउ मोला लगथे कि सचमुच म ये हर आत्महत्या करे हे, अब मंय हर अपन रकम ल रख लेथंव। ओ, पाप महापाप। मोला कोनो हजार रूबल दिही तभो मंय हर इहाँ नइ बइठतेंव ......  बिदा भाई हो।’’

कैसाक हर धीरे-धीरे रेंगे के सुरू करिस अउ फेर ठाड़ हो गिस, ’’मोला समझ म नइ आवत हे कि मंय हर का करंव,’’ वोहर कुरबुरा के किहिस, ’’बिहिनिया के होवत ले इही कना आगी तापत बइठे रहंव ...... तब मोला डर लागही.... अउ अकेल्ला रद्दा रेंगे म घला डर लागही। मरइया हर तो मर गे फेर मोर मुसीबत कर दिस।...... सच कहव तब प्रभु हर मोर परछो लेवत हे। अभी तक तो कुछुच नइ होइस, अउ घर तीर आ के अइसन मुसीबत। मंय नइ जा सकंव ........।’’

’’ये यब भयानक हे, ये बातहर सही हे।’’

’’मंयहर भेड़िया मन से, अंधियार से अउ चोर से नइ डरंव, पन मुरदा मनखे ले मोला डर लगथे। मंयहर वोकर ले डरथंव अउ ये सब वोकरे खातिर हरे। मोर भले, पुरामनपंथी भाई हो, तुहंर ले बिनती हे, मोला गाँव म अमरा देव।’’

’’हमला केहे गे हे कि लहस ल छोड़ के कहूँ जाहू झन।’’

’’कोनो ल पता नइ चलही मोर भाई हो, मोर आत्मा हर कहिथे, कोनो ल पता नइ चलही। प्रभुहर तुम्हला सौ गुना जादा इनाम दिही। सियान! मोर संग चल। मंयहर बिनती करत हंव। सियान! तंयहर चुप काबर हस?’’

’’वोहर एकदम सिधवा हे,’’ जवान हर किहिस।

दोस्त! तब तंयहर मोर संग चल। मंयहर तोला पाँच कोपेक देहूँ।’’

’’पाँच कोपेक! मंय चल सकथंव,’’ जवान हर मुड़ी न खजवावत किहिस, ’’महूँ ल सियोमा ल अकेला छोड़ के जायबर नइ केहे हे। हमर सिधवा, सियोमा हर यदि इहाँ अकेल्ला रहि सकही, तब मंयहर आपके संग जा सकथंव। सियोमा! तंयहर इहाँ अकेला रहि जाबे?’’ 

’’हव।’’ सिधवा हर अपन सहमति दे दिस।

’’ठीक! तब बहुत बढ़िया, मोर संग म चल।’’ 

जवान हर उठिस अउ कैसोक संग चल दिस। मिनट भर बाद उंकर गोड़ के आवाज हर धीरे-धीरे कम होवत गिस। उंकर बातचीत के आवाज हर आना बंद हो गिस।

सियोमा हर अपन आँखीमन ल मूंद के चुपचाप बइठ गिस। अंगीठी हर मद्धिम होवत गिस अउ अंधकार के आवरण हर लहस ल ढंक लिस।
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गुरुवार, 23 मई 2019

अनुवाद

मोट्ठा अउ दुबला - एंटोन चेखव 

(FAT AND THIN के छत्तीसगढ़ी अनुवाद - कुबेर)


दू झन मितान के, जउन म एक झन हर ह मोट्ठा रिहिस अउ दूसर ह दुबला रिहिस, अचानक निकोलेवस्की स्टेशन म भेट हो गिस। मोटल्ला हर खाना खाके डकारत निकलत रिहिस अउ वोकर ओठमन हर चेरी कस चिक्कन रिहिस अउ चमकत रहय। वोहर शेरी अउ बेगोर डोरंगे झड़क के निकलत रिहिस। वोकर कपड़ामन ले महंगा इत्र (Fleur d'orange) के खुसबू आवत रहय। दुब्बर हर रेलगाड़ी ले कइसनोे करके अपन डब्बा ले निकले रहय। वोकर तीर सूटकेस, संदूक अउ खूब अकन समान रहय। वोकर मुँहू ले सूअर के सुक्खा मांस अउ काफी के गंध आवत रहय। वोकर पीछू-पीछू लंबा डाढ़ीवाली वोकर घरवाली अउ एक झन स्कूल म पढ़इया लइका जेकर एक आँखी हर खराब हो गे रिहिस, आवत रिहिन।

’’पोर्फिरी’’ दुब्बर आदमी ल देख के मोटल्ला आदमी हर चिल्लाइस। ’’तंय हरस? मोर मयारुक संगवारी! कतका गरमी अउ कतका ठंडकाला बीत गिस तोर से मिले।’’

’’ओहो, पवित्र संत पुरूष,’’ दुब्बर हर चकरित खा के चिल्ला के किहिस, ’’मीशा! मोर बचपन के संगवारी! तंय कोन डहर ले टपक गेस?’’

दुनों संगवारमन एक-दूसर ल तीन घांव ले चूमिन। एक-दूसर ल देख के दुनों के आँखींमन डबडबा गिन। दुनों ल एक-दूसर ले मिल के घोर आस्चर्य होइस।

एक-दूसर ल चूमे के बाद दुब्बर हर किहिस, ’’मोर मयारुक बच्चा, अचानक भेट हो जाही कहिके मंय हर तो सोचे घला नइ रेहेंव। सचमुच आस्चर्य के बात हे। बने ढंग ले मोला देख ले। मंय अभी घला वोतकिच सुदर हंव, जइसे पहिली रेहेंव। एकदम मयारुक अउ छैला जवान। मोला बहुत अच्छा लगिस। अब तंय बता, कइसे हस? अपन किस्मत ल चमकायेस कि नहीं? बिहाव करेस कि नहीं? जइसे कि देखतेच हस, हम तो बिहाव कर डरे हन ........ये हर मोर घरवाली लुईस हरे। लुथेरन परंपरा के मुताबिक येकर मायके के नाम वैंटसेनबैक रिहिस। अउ येहर मोर बेटा हरे, नफनैल, अभी स्कूल म तीसरी कक्षा म पढ़त हे। ये हरे स्कूल के जमाना के मोर मितान, नफन्या। स्कूल म हमर संग कभी नइ छूटय।’’

नफनैल हर थोरिक देर सोचिस अउ बाप के मितान के  सम्मान म अपन टोपी ल निकाल लिस।

’’स्कूल म हमर संग कभी नइ छूटय,’’ दुब्बर हर बात ल आगू बढ़ाइस, ’’तोला सुरता हे, लइकामन तोला कइसे कुडकावंय? वोमन तोर नाम बढ़ाय रिहिन, हेरोस्ट्रेटस, काबर कि तंय हर एक घांव अपन किताब मन ल सिगरेट म जला के छेदा-छेदा कर डरे रेहेस। अउ मोर नाव बढ़ाय रहंय, एफिलिट्स, काबर कि मोला किस्सा-कहानी कहे म मजा आवय। हो ..... हो.... बचपनप के बात आय, नफन्या, लजा मत। इहाँ आ, येहर मोर घरवाली हरे, लुथेरन परंपरा के मुताबिक येकर मायके के नाम वैंटसेनबैक हे। ....... ’’

नफनैल हर पता नइ, का सोचिस ते बाप के पीछू म जाके लुका गिस।

’’अच्छा हे, मयारुक संगवारी, अब तंय बता, कइसे हस?’’ अपन संगवारी डहर प्यार से देखत मोठल्ला हर पूछे के सुरू करिस, ’’का तंय हर नौकरी करथस? कोन दर्जा तक पहुँचे हस?’’

’’मंय तो सबके दुलरवा बच्चा हंव! दू बरस हो गिस, मंयहर कालेज म मूल्यांकनकर्ता के पद म हंव अउ मोर कना स्टानिस्लाव घला हे। पन तनखा हर एकदम कम हे, कोई बात नहीं! मोर घरवाली हर संगीत के कक्षा चलाथे। अउ मंय हर नौकरी के संग निजी तौर म लकड़ी के नक्कासीदार सिगरेट डब्बा, ’कैपिटल्स सिगरेट केस’ बेचे के काम करथंव। एक डब्बा के एक रूबल लेथंव। अउ कोनो हर दस ठन लेथे तब, सवाले पैदा नइ होवय, कम करथंव। कइसनो करके पइसा आना चाही, बस। आप तो जानथव, मंयहर लिपिक के काम करथंव, अउ अब मोर इहाँ विहिच विभाग म टरान्सफर हो गे हे। अब मय इहाँ काम करेबर जावत हंव। अउ अब आप अपन बारे म बतावव? मंय हर सरत लगा सकथंव, अब तक आप सिविल पारसद नइ बन गे हव? अंय?’’

’’बिलकुल नहीं मोर प्रिय बच्चा, वोकरो ले ऊँचा बढ़ जा,’’ मोटल्ला आदमी हर किहिस, मंय तो पहिलिच प्रिवी काउंसलर बन चुके हंव ..... मोर कना दो स्टार हे।’’

सुनके दुब्बर मनखे के मुँहू हर पिंवरा गिस अउ फक पर गिस। जल्दी वोहर अपन चेहरा ल मुरेर-मुरिर के  बनावटी हँसी हँसे लगिस। अइसे लगिस कि जानोमानो वोकर आँखी अउर वोकर चेहरा ले चिंगारी निकलत होय। वोहर फुसफुसा के कुछू किहिस। वोकर चेहरा म हीन भाव दिखे लगिस। वोकर चेहरा ले खुसी के जम्मों भाव गायब हो गिस। वोला अपन सूटकेस, संदूक अउ समान मन तुच्छ लगे लगिस। ....... वोकर घरवाली के लंबा डाढ़ी हर अउ लंबा दिखे लगिस। वोकर बेटा, नफनैल हर एकदम सावधान हो गिस अउ अपन डरेस के बटनमन ल ठीक करे लगिस।

’’महामहिम! मोला खुसी होइस! कोनो कहि सकथे कि बचपन के संगवारी हर अब एक महान व्यक्ति बन चुके हे! वोहर... वोहर..!’’

’’अरे नहीं, नहीं, प्यारे।’’ मोटल्ला हर बात ल आगू बढ़ावत किहिस, ’’अचानक तोला का हो गिस? मंय अउर तंय अभी घला वइसनेच संगवारी हन जइसे बचपन म रेहेन। अउ कोनो आधिकारिक औपचारिकता निभाय के जरूरत नइ हे।’’

’’आप दयालु हव महामहिम! ये आप का कहत हव........?’’ दुब्बर आदमी ल जइसे साँप सूँघ लिस होय, पहिली ले अउ जादा किलौली करत किहिस, ’’महामहिम! आपके किरपा हे जउन मोला अतका महत्व देवत हव, जइसे कि मोर खातिर सरग के भोजन ....... ये, महाहिम, मोर पुत्र नफनैल, ...... मोर पत्नी, लुईस, निस्चित रूप से लुथेरन ।’’

मोटा आदमी हर थोरिक विरोध करे के कोसिस करिस, वोला समझाय के कोसिस करिस, पन दुब्बर अदमी के चेहरा म अपार श्रद्धा, विनम्रता अउ आत्मिक सम्मान के जउन भाव परत देखिस वोकर ले वोहर हार गिस। वोला पतला आदमी ले दुरिहा घूँचना उचित लगिस, फेर जावत-जावत वोहर अपन हाथ ल वोकर हाथ म दे दिस।

पतला आदमी हर वोकर तीन अँगरी ल दबाइस, अउ वोकर सम्मान म अपन पूरा सरीर ल झुका लिस अउ चीनीमन सरीख छींकिस। 

’’वो ...वो.... वो।’’ वोकर घरवाली हर मुसकाइस। नफनैल हर एड़ी रगड़ के अपन टोपी ल उतार लिस। 

तीनों के तीनों अपन हार स्वीकार कर चुके रिहिन।
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टीप:-
1. Fleur d'orange: एक परकार के इत्र।
2. Lutheran:  रसियन मूल के जरमन अल्पसंख्यक।
3. Nafanail:  रूस में एक मजाकिया नाम
4. Herostratus:   356 ई. पूर्व के एक विक्षिप्त आदमी जउन हर आर्टेमिस के मंदिर के मंदिर ल जला देय रिहिस।
5. The Stanislav:   रूस म तेरहवाँ नंबर के सरकारी पद
6. Privy councillor:  रूस म तीसरा नंबर के सर्वोच्च सरकारी पद
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बुधवार, 22 मई 2019

अनुवाद

जूतासाज अउ सैतान - अंतोन चेखव

THE SHOEMAKER AND THE DEVIL
(द शूमेकर एंड द डेव्हिल के छत्तीसगड़ी अनुवाद - कुबेर)


क्रिसमस तिहार के समय रिहिस। मारिया ल चुल्हा तीर सुते बहूत देर हो गे रिहिस, मोमबत्ती के जम्मो मोम ह टघल-टघल के बोहा गे हे, अउ फ्योदोर निलोव ह अभी ले अपन काम म भिड़ेच हे।

वोला अपन काम ल बंद करके बहुत पहिलिच खोर-गली म निकल जाना रिहिस, पन कोलोकॉली गली के रहवासी एकझन गिराहिक ह पंदरही पहिली वोला एक जोड़ी पनही बनाय के आडर देके गे रिहिस। पनही नइ बन पाइस  अउ काली विही गिराहिक ह आके फ्योदोर निलोव ल गारी-गुफ्तार करके गे हे अउ यहू चेताय हे कि काली बिहिनिया होय के पहिली पनहीमन जरूर बन चाही।

’’यहू हर अपराधी जीवन समान हे।’’ काम करत-करत फ्योदोर हर बड़बड़ाइस, ’’कतरो आदमी नींद भांजत हें उ कतरोमन आराम करत हें जबकि मंय हर हत्यारा बरोबर वो सैतान के पनही सिलत बइठे हंव, ये बात ल कोन जानही.............।’’

अचानक झपकी झन आ जाय अउ ढलंग झन जांव कहिके वो हर मेज के खाल्हे एक ठन बोतल रखे रहय जउन ल वो हर रहि-रहि के पीयत जाय, अउ पीये के बाद अपन मुड़ी ल झटकार के अउ चिल्ला के कहय, ’’कोनो दया करके मोला बतावव, का कारण हे कि गिराहिक ह अपन आप म मस्त हे जबकि मंय ह इहाँ काम करे बर मजबूर हंव? काबर कि वोहर पइसावाला हरे अउ मंय ह भिखारी हरंव?’’

वोला अपन गिराहिकमन ऊपर नफरत होय लगिस, खास करके कोलोकॉली गली के वो गिराहिक बर। का होइस कि उदसहा बानी के वो आदमी हर सभ्य दिखथे पन वोकर लंबा चूँदी हे, चेहरा हर पींवरहा हे, नीला रंग के चस्मा पहिरे रथे, अउ जहर सही वोकर बोली हे। वोकर नाव जरमनी म हे जेकर सही उच्चारन कोनो नइ कर सके। वोकर सही-सही पहिचान अउ काम के बारे म बता पाना असंभव हे।

पंदरही पहिली के बात फ्योदोर ल सुरता आ गे जब नाप लेय बर वोहर गिराहिक के घर गेय रिहिस तब वो गिराहिक हर फर्रस म बइठ के उदानी (खप्पर) म कुछू डारत रहय। फ्योदोर के जोहार करे के पहिलिच उदानी (खप्पर) म डारल जिनिस मन अचानक चमकदार लाल लौ के संग भक ले भभक गिस अउ गंधक अउ चिरइमन के पंख जरे के गंध आय लगिस। खोली हर पींयर रंग के धुंगिया ले भर गिस। फ्योदोर ल पाँच घांव ले छिंकासी आइस। 

अउ जब सब होय के बाद वोहर घर आइस तब सोचिस, ’’कोनो आदमी, जेकर मन म ईश्वर के डर होही, अइसन कोनो काम करिच नइ सकय।’’

अउ जब बोतल ह खाली हो गिस, फ्योदोर हर पनही ल टेबल म मढ़ा दिस अउ मुड़ी धर के बइठ गिस, अउ अपन गरीबी के बारे म सोचे लगिस, दिन-रात हाड़तोड़ मेहनत करे के बाद घला वोला अपन जीवन म खुसी के कोनो आस नजर नइ दिखिस। अउ तब वोहर अमीर मनखे, उंकर बड़े-बड़े बंगला, उंकर सवारी गाड़ी अउ उंकर सौ-सौ रूबल के नोट के बारे म सोचे लगिस .......... कितना अच्छा होतिस कि उंकर बड़े-बड़े बंगलामन ल सैतान ह आगी लगा देतिस, उंकर सब घोड़ामन मर जातिन, उंकर फर के कोट अउ सेबल के टोपीमन चिथरा हो जातिन। ये साल के क्रिसमस ह कितना सानदार होतिस कि ये सब अमीरमन धीरे-धीरे भिखारी बन जातिन, इंकर तीर कुछुच नइ बाँचतिस। अउ वो खुद, गरीब जूतासाज, धीरे-धीरे अमीर बन जातिस, अउ बाँकी जम्मों गरीब जूतासाज मन के मालिक बन जातिस।’

इही तरीका ले सपनावत-सपनावत फ्योदोर ल अचानक अपन काम के सुरता आ गिस अउ वोकर आँखी मन उघर गिन।

’’एक काम करे जाय,’’ पनहीमन ल देखत-देखत वोहर सोचिस, ’’काम तो कब के खतम हो गे हे अउ मंय हर इहिंचेच बइठे हंव। अभी तक तो मोला ये पनहीमन ल वो सज्जन गिराहिक घर अमरा के आ जाना रिहिस।’’

वोहर पनहीमन ल लाल रंग के उरमाल म लपेटिस, वोला धरिस अउ सड़क म निकल गिस। बाहिर म बारीक-बारीक पन ठोस बरफ गिरत रहय अउ वोकर चेहरा म सुजी गोभे  सरीख परत रहय अउ भयानक ठंड परत रहय, सड़क म फिसलन अउ अँधिेयारा रहय। सड़क म लगे गैस बत्तीमन टिमिक-टिमिक बरत रहय। इही पाय के फ्योदोर हर खाँस के अपन गला ल साफ करिस। अमीर मनखे मन सड़क म अपन-अपन घोड़ा गाड़ीमन ल अउ स्लेजगाड़ीमन ल जतखत चलावत रहंय। वोमन हैम अउ वोदका के बोतल धरे रहंय। उंकर गाड़ी म बइठे अमीर महिला अउ जवान लड़कीमन वोला देखके गाड़ी ले अपन मुड़ी निकाल-निकाल के हँसत अउ चिल्लवावत रहंय, ’’भिखारी, भिखारी।’’

छात्र, अधिकारी अउ बैपारीमन, जउनमन वोकर पीछू-पीछू आवत रहंय, वोला, ’’सराबी, सराबी, अछूत मोची, नीच भिखारी कहिके वोकर मजाक उड़ावत चिल्लावत रहंय।’’ 

ये सब बातमन ह अपमानजनक रिहिस पन फ्योदोर हर अपन जुबान ल काबू म रखिस अउ खाली घृणा के मारे थूँक दिस। पन जब वारसा के बड़े जूतासाज कुज्मा लिबोडकिन से वोकर मुलाकात होइस अउ जब वोहर बताइस कि, ’’मंयहर एक झन अमीर महिला संग बिहाव कर लेय हंव, मोर तीर काम करनेवाला कतरो कारीगिर हें जबकि तंय हर भिखारी के भिखारी हस अउ तोर तीर खायबर घला कुछुच नइ हे,’’ तब फ्योदोर ल सहन नइ होइस। वोहर वोला दंउड़ाय के सुरू करिस अउ कोलोकॉली लेन के पहुँचत ले वोला दंउड़ाइस।

वोकर गिराहिक ह चैथा नंबर के घर के सबले ऊपरी मंजिल म आखिरी कोन्टा म रहय। उहाँ पहुँचे बर वोला एक ठन लंबा-चैड़ा, अँधियारी आँगन ल पार करे बर परिस अउ तब वोला लंबा अउ सरहा सिढ़िया म चढ़े बर परिस जिहाँ चढ़त खानी ककरो घला गोड़ ह डगमगा जातिस। जब फ्योदोर ह वोकर तीर पहुँचिस तब वो हर फर्रस म बइठ के उदानी (खप्पर) म कोनो जिनिस डारत रहय, बिलकुल वइसनेच जइसे वो हर पंदरही पहिली करत रिहिस।

’’आपके जय हो, मंय हर आपके पनहीमन ल लाय हंव।’’ फ्योदोर ह अनमनहा हो के किहिस।

गिराहिक ह चुपचाप उठिस अउ पनही ल पहिरे के कोसिस करे लगिस। वोकर मदद करे बर फ्योदोर ह माड़ी के भार बइठ गिस अउ वोकर जुन्न पनहीमन ल खीच के निकाल दिस।  पनहीमन ल जइसे निकलिस वइसने वोहर डर के मारे उछल के खड़ा हो गे अउ  दुवारी कोती दंउड़े लगिस। गिराहिक के गोड़मन म पंवरी नइ रहय, पंवरी के जघा खुर रहय जइसन कि घोड़ा मन के रहिथे। 

’’हे भगवान’’ फ्योदोर ह सोचिस, ’’एक काम करना चाही।’’ सबले पहिली डरना छोड़के क्रास बनाना चाही, फेर सब ल छोड़के खाल्हे कोती भागना चाही। पन तुरंत वोहर सोचिस, सैतान संग पहिली घांव अउ हो सकथे आखिरी घांव भेट होय हे, अइसन म येकर फायदा नइ उठाना बड़ा भारी मूर्खता होही। वोहर अपन डर ल काबू म करिस अउ अपन किस्मत आजमाय के कोसिस करे लगिस। क्रास बनाय बर बचे खातिर वोहर अपन हाथमन ल पीठ कोती लेग के बांधलिस अउ बहुत सम्मानजनक ढंग ले खखार के बोले के सुरू करिस, ’’लोगन कहिथें कि दुनिया म सैतानमन ले बढ़के अउ कोनो जादा बुरा नइ होवय, पन हे महामहिम! मंयहर कहिथंव कि दुनिया म सैतान ले जादा शिक्षित अउ कोनो नइ होवय। सैतानमन के, माफ करिहव, खुर अउ पूछी के सिवा अउ कोनो बुराई नइ होय, पन उंकर तीर हजारों विद्यार्थीमन ले जादा बुद्धि होथे।’’

’’आप जउन कहत हव वोकर ले मंय हर खुस हंव,’’ मसका मारत शैतान हर किहिस, ’’धन्यवाद जूतासाज, आप मोर ले का चाहथव?’’

अउ बिना समय बरबाद करे जूतासाज हर अपन किस्मत के रोना रोय लगिस। वोहर कहेके सुरू करिस कि ननपन ले वोहर अमीरी के सपना देखत आवत हे। वोला ये बात के नाराजगी हे कि काबर सब आदमीमन एक समान बड़े घर म नइ रहंय। वोहर पूछिस, वोहर काबर गरीब हे? का वोहर वारसाव के कुज्मा लिबोडकिन ले घला गयगुजरे हे जेकर तीर खुद के घोड़गाड़ी हे अउ जेकर घरवाली हर टोपी पहिरथे? वोकरो वइसने नाक, वइसने हाथ, वइसने गोड़, वइसने पीठ हे, जइसन अमीरमन के होथे पन काबर वोला काम करे बर मजबूर होना परथे जबकि बाकीमन मौज करत रहिथें? काबर वोला मारिया जइसन महिला संग बिहाव करे बर परिस, खुसबू ले महकत कोनो दूसर महिला संग वोकर बिहाव काबर नइ होइस? अमीर गिराहिक मन के बड़े-बड़े घर म वोहर सदा सुदर-सुदर जवान महिला देखथे पन या तो वोहर उंकर कोनो बात ऊपर कुछू धियान नइ देवय या जब वोहर धियान देथे तब वोमन वोला देख के हाँसत रहिथे अउ कहत रहिथे, ’वाह, देख तो, लंबा लाल नाक वाले जूतासाज हे।’ ये बात सच हरे कि मारया हर नेक हे, दयालु हे, हाड़तोड़ मेहनत करनेवाली हे पन वोहर पढ़े-लिखे नइ हे, वोकर हाथ हर भारी अउ कठोर हे, अउ जब कोनो वोला राजनीति या कोनो बौद्धिक विसय ऊपर बोले बर कहिथे तब वो हर भारी मूर्खतापूर्ण बकवास के सिवा अउ कुछुच नइ बोल सकय।

’’तब आखिर तंय का चाहथस?’’ गिराहिक हर वोला बीच म टोकिस।

’’महामहिम सैतान इवानिच! आपसे मोर बिनती हे कि कृपा करके आप मोला अमीर आदमी बना दव।’’

’’बिलकुल। बदला म मोला आप ल मोला अपन आत्मा ल देय बर परही। बिहिनिया, कुकरा बासे के पहिलिच आप ल ये कागज म दस्तखत करे बर परही कि आप मोला अपन आत्मा ल सौंपत हव।’’

’’महामहिम,’’ फ्योदोर ह बिनती करिस, ’’जब आप मन मोला एक जोड़ी पनही बनाय के आदेस देव तब मंय हर तो आपमन ले कोनो पेसगी नइ मांगे रेहेंव। कोनो घला आदेस पहिली देथे अउ चुकारा माल मिले के बाद करथे।’’

’’हाँ, हाँ, बहुत अच्छा।’’ गिराहिक हर उत्तर दिस।

उदानी हर अचानक भभक गिस अउ चमकदार लौ निकले लगिस। गुलाबी रंग के गाढ़ा धुँगिया निकलिस अउ गंधक अउ जलत पंख के गंध आय लगिस।

धुँगिया कम होय के बाद फ्योदोर हर अपन आँखींमन ल रमंज के देखिस कि अब न तो वोहर जूतासाज रहि गिस हे अउ न तो फ्योदोर, बल्कि कोनो दूसर आदमी बन गे हे जउन मस्त कमरकोट पहिरे हे, चैन घड़ी रखे हे, नवा पाजामा पहिरे हे अउ एक ठन बड़े जबर टेबुल तीर आरामी कुरसी म बइठे हे। दू झन सेवकमन वोला छप्पन भोग परोसत हें, अउ परोस के बिनती करत हें, ’’महामहिम, भोजन करे के किरपा करव, आप ल अच्छा लगही।’’

का दौलत रिहिस! सेवकमन वोला भुँजाय मटन अउ खीरा परोसिन, अउ तब भुँजाय हंस लाइन, अउ थोरिकेच पीछू घोड़मुरई के चटनी के संग सूअर के उबले मांस लाइन। ये सब बहुत राजसाही ढंग ले गरिमा अउ सम्मानजनक ढंग ले होइस। फ्योदोर ह खावत जाय अउ गिलास भर-भर के कीमती वोदका पीयत जाय जइसे कि कोनो जनरल, नइ ते कोनो जमीदारमन करथें। अूअर के मांस के बाद वोला उबले अनाज देय गिस, फेर गोस्तचर्बी के संग आमलेट अउ फेर तलल कलेजी। फ्योदोर ह मजा ले ले के खाइस अउ खाके बेहद खुस होइस। अउर का? गोंदली संग पाई अउ क्वास के संग सलजम घला वोला परोसे गिस।

खाय के बाद वोहर सोचिस, ’’अतका खाय के बावजूद अमीर मनखेमन के पेट फूटे काबर नहीं?’’

आखिर म बड़ेजन बरतन म वोला मदरस देय गिस।

रात के भोजन के बाद नीला चस्मा पहिरके सैतान ह परगट होइस अउ सिर नवा के वोला पूछिस, ’’खाना हर पसंद आइस, फ्योदोर निलोव?’’

पन फ्योदोर हर कोनो जवाब नइ दिस, जेवन करे के बाद वोला असमड़ लगत रहय। वोकर मन हर बदला के भावना ले भर गे रिहिस जेकर कारण वोला भयानक गुस्सा आवत रहय। वोहर अपन पनहीमन कोती देखिस अउ पूछिस, ’’मंयहर कभू साढ़े सात रूबल से कम के पनही नइ पहिरंव, ये पनहीमन ल कोन हर बनाय हे?’’

’’कुज्मा लिबोडकिन हर,’’ सेवकमन जवाब दिन।

’’वो मूरख ल अभी बलाव।’’

वारसा के कुज्मा लिबोडकिन ल तुरंत बलाय गिस। वोहर आके दुवारी मेर बहुत सम्मानजनक ढंग ले खड़े हो गिस अउ पूछिस, ’’महोदय! मोर खातिर का आदेस हे?’’

’’जुबान संभाल के बात कर,’’ फ्योदोर हर धमकाइस अउ अपन गोड़मन ल पटकिस, ’’मोर संग हुज्जत करे के कोसिस झनकर, अपन जघा ल झन भूल, उल्टाखोपड़ी, तंय मोची हरस। का तोला पता नइ हे कि पनही कइसे बनाय जाथे? मार-मार के तोर बदसूरत चेहरा के चटनी बना देहूँ! इहाँ तंय काबर आय हस?’’

’’पइसा खातिर।’’

’’पइसा खातिर? मोर आगू से भग जा, सनीचर के दिन आबे। अरे, येला एक तमाचा लगा तो।’’

पन वोला तुरते सुरता आ गिस कि वोकर खुद के जीवन हर का हे अउ गिराहिकमन वोकर संग कइसे बेवहार करथें। वोकर मन हर भारी हो गिस। अपन धियान ल दूसर कोती करे बर वोहर अपन खीसा ले एक ठन बटुआ निकाल लिस अउ पइसा गिने लगिस। बटुआ हर रकम ले भरे रहय, पन फ्योदोर ल तो वोकरो ले जादा के इच्छा रिहिस। नीला चस्मा पहिरे सैतान हर गिलोली करत दुसरा बटुआ लान के दिस। पन वोला तो वोकरो ले जादा होना। अउ जादा, अउ जादा। वोहर रकम ल गिनिस अउ उदास हो गिस।

सांझकुन सैतान हर वोकर सामने लाल पोसाक म सजेघजे एक सुंदर जवान महिला ल लाइस अउ किहिस, कि ये हर आपके नवा पत्नी हरे।

वोहर सांझ ल अपन पत्नी संग चुमाचाटी अउ अदरक के मीठ रोटी खाय म बिताइस। रातकुन वोहर पंख के बनल सुंदर मुलायम गद्दावाले बिस्तर म सुतिस पन वोला नींद नइ आइस अउ एती ले वोती कलथी मारे लगिस। वोला लगिस कि वोहर बेहोस हो गे हे।

’’हमर कना अब अपार धन हे।’’ वोहर अपन घरवाली ल किहिस, ’’हमला भले ढंग ले देख लेना चाही कि बाहिर कोनो चोर तो नइ खड़े हे। अच्छा होही कि तंय हर मोमबत्ती धर के जा अउ देख के आ।’’

वोला सरीरात नींद नइ आइस, तिजोरी के रखवारी म रात हर बीत गिस।

बिहिनिया वोहर सुबह के प्रार्थना करे बर गिरिजा घर गिस। गिरिजा घर म वोहर देखिस कि इहाँ अमीर-गरीब, सब के एक समान सम्मान हे। फ्योदोर हर जब गरीब रिहिस तब अइसन प्रार्थना करय, ’’हे ईश्वर! मोला छिमा कर, मंय हर पापी हंव।’’ अब अमीर होय के बाद घला वोहर इहिच बात ल कहही। तब अमीर अउ गरीब म का फरक हे? अउ मौत के बाद धनवान फ्योदोर ह सोना अउ हीरा के कबर म दफन नइ होय, इही करिया रंग के धरती म दफन होही, जिहाँ गरीब अउ मोचीमन घला दफन होथें। 

फ्योदोर अउ मोची दुनों, एके आगी म लेसाहीं। फ्योदोर ल गुस्सा आय लगिस, वोहर अपन रात के भोजन से सबके तुलना करे लगिस, अउ प्रार्थना करे के बजाय वोहर मनेमन तिजोरी, धन अउ चोरमन के बारे म सोचे लगिस। वोहर अपन बदले आचरन अउ बरबाद आत्मा के बारे म सोचे लगिस।

सोचत-सोचत वोहर पगला गिस अउ फौरन गिरजा घर ले निकल गिस। ये सब दुखदायी बिचार ले छुटकारा पाय खातिर, जइसन कि वोकर आदत रिहिस, जोर जोर से गाना गाय लगिस। फौरन एक झन पुलिसवाले हर दंउड़ के आइस अउ वोकर टोपी के टीप ल छू के किहिस, ’’महोदय, एक सज्जन आदमी ल अइसन ढंग ले सड़क म चिल्ला-चिल्ला के गाना सोभा नइ देवय। आप कोनो मोची नो हव।’’

फ्योदोर हर रूँधना म निहर के खड़ा होके सोचे लगिस कि अपन मन बहलाव बर वोहर का करे? ’’महोदय,’’ एक झन कुली हर आके चिल्लाइस, ’’रूँधना म अइसन निहर के झन खड़ा होवव, आपके सुंदर फर के कोट ह गंदा हो जाही।’’

फ्योदोर हर एक दुकान ल चल दिस अउ एकठन बहुत बढ़िया बाजा खरीद लिस अउ सड़क म आके वोला बजाय लगिस। सब आदमी वोकर डहर देख के हाँसे लगिन।एक झन कोचवान हर वोला ताना मारत किहिस, ’’देखव भला, अब तो सज्जन मनखेमन घला मोचीमन सरीख ......... ।’’

’’सभ्य मनखे मन ल गली-सड़क म अइसन उटपुटांग हरकत करना सोभा नइ देवय,’’ एक झन पुलिसवाले हर आके किहिस, ’’उचित होही कि आप कोनो मधुसाला म चल देवव।’’

भिखारीमन फ्योदोर ल चारों मुड़ा ले घेर लिन अउ केहे लगिन, ’’महासयजी, हमला तिनचकिया गाड़ी दे दव, ईश्वर आपके भला करही।’’

पहिली, जब वोहर जूतासाज रिहिस हे, भिखारीमन वोला कोनो भाव नइ देवंय, अउ अब, वोला छोंड़य नहीं।

अउ वोती घर म, वोकर नवा घरवाली, वो महिला हर, वोकर अगोरा करत बइठे रहय। वोहर हरियर रंग के बलाउज आ लाल रंग के लहँगा पहिरे रहय।

वोहर सोचिस, येहर मोर खातिर अतका चिंतित काबर हे। अउ वोकर पीठ म चपत लगाय खातिर वोहर अपन हाथ ल उठाइस, पन वोकर घरवाली हर फुनफुनवत किहिस, ’’असभ्य, अज्ञानी आदमी, आपला अतका घला पता नइ हे कि एक सभ्य महिला संग कइसन बेवहार करना चाही? यदि तंयहर मोला प्यार करथस तब मोर हाथ ल चूमना चाही। मोला अइसन मारहू तब मोला सहन नइ होही।’’

’’अइसन जीवन घला का जीना!’’ फ्योदोर हर सोचिस,  ’’अइसन आदमीमन के जीवन हर घला का जीवन हरे! आप ल गाना नइ गाना चाही, आप बाजा नइ बजा सकव, आप कोनो महिला के संग हँसी मजाक नइ कर सकव ..... उफ।’’

वोहर अभी अपन घरवाली संग चहा पीये बर बइठे घला नइ रिहिस अउ वो नीला चस्मावाले सैतान हर परगट हो गिस, किहिस, ’’आ जा फ्योदोर निलोव, अब मंय हर मोला जउन करना रिहिस, करके देखा देंव। अब मोर कागज म दस्तखत करव अउ मोर संग आवव।’’

अउ सैतान हर फ्योदोर ला खींच के सीधा नरक म लेग गिस अउ खुद अंतरधान हो गिस। चारों डहर ले सैतान मनहर चिल्लाय लगिन, ’’मूरख, उल्टा खोपड़ी, गघा।’’

नरक म मोम के भयानक डरावना गंध बगरे रहय उअ उहाँ साँस लेना तको मुस्किल होवत रहय। 

अउ अचानक सब कुछ गायब हो गिस।

फ्योदोर हर अपन आँखींमन ल उघारिस अउ टेबुल म रखाय पनहीमन ल अउ टीपा के चिमनी ल देखिस। 

चिमनी के काँच हर घुँगिया के मारे करिया गे रिहिस। चिमनी के बाती ले बेहद मद्धिम अंजोर अउ बेहद बदबूदार धुँगिया आवत रहय। टेबुल के नजीक म नीला चस्मा पहिरे गिराहिक हर खड़े हो के गुस्सा म चिल्लवात रहय,  ’’मूरख, उल्टा खोपड़ी, गघा। बदमास, आज मंय हर तोर मजा बताहूँ। आडर लेय पंदरही होगे अउ आज ले मोर पनहीमन ल बनाय नइ हस। तोर हिसाब से मोर पनही खातिर का मंय हर रोज दसों चक्कर लगावँव? नीच, जंगली।’’

फ्योदोर हर अपन मुड़ी ल डोलाइस अउ पनही मन ल तइयार करे लगिस। तब तक गिराहिक हर वोला गारीगुफ्तार करत अउ धमकावत खड़ेच रिहिस। सुनत-सुनत जब थक गिस तब फ्योदोर हर वोला प्यार से पूछिस, ’’आप का बेवसाय करथव महोदय जी।’’

’’मंय हर बंगाल के आतिसबाजी के काम करथंव। मंयहर आतिसबाजी के मिस्त्री हरंव।’’ अउ वोहर बिहिनिया के प्रार्थना गाय के सुरू कर दिस। फ्योदोर हर वोला वोकर पनहीमन ल दिस अउ पइसा लेके गिरिजाघर कोती चल दिस।

भालू के खालवाले कालीन लगे गाड़ी अउ स्लेजमन सड़क म येती-वोती चलत रहंय। वैपारी, महिला अउ अधिकारी, सबमन गरीब जनता संग संघरा फुटपाथ म चलत रहंय ......... पन फ्योदोर ल न तो उंकर मन से ईरखा होइस अउ न उंकर ठाटबाट ल देख के कोनो जलन होइस। अब वोला लगे लगिस कि दुनिया म अमीर होय कि गरीब, सब बराबर दुखी हें। कोनो अपन घोड़ागाड़ी म मगन हे तब कोनो जोर-जोर से गाना गाय म अउ कोनो अपन बाजा बजाय म मगन हे। पन एक बात सब बर समान हे, सब ल एके समान कबर म दफन होना हे। अउ येकर खातिर अपन जीवन ल, आपन आत्मा के छोटे ले छोटे अंस ल घला सैतान के हवाले करना उचित नइ हे।
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