शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

कविता

हौसला

दुनिया में जो भी शास्वत है
भूख उनमें प्रथम है
भूख उनसे अलग है
दुनिया का सारा व्यापार
भूख का व्यापार है
भूख का व्यापार
दुनिया का आदिम व्यापार है
दुनिया में
कुछ लोग भूख को भुनानेवाले होते हैं
और बहुत सारे लोग भूख से लड़नेवाले
भुनानेवालों की भूख कभी मिटती नहीं
और लड़नेवालों की जीत कभी होती नहीं
भूख जिनकी मिटती नहीं
उन्होंने जाना नहीं भूख को कभी
भूख के पहले हाज़िर हो जाती है
व्यंजनों की थालियाँ उनके सामने
भूख से लड़नेवाले
व्यापित होती है रग-रग में जिनकी भूख
उनके सामने हाजिर होता है
केवल भूख का सवाल हर पल - यक्ष की तरह
व्यंजनों की थाल नहीं दिखती कभी उन्हें
कल्पना में और सपने में भी कभी
भूख को महसूस करना अलग बात है
पर भूख सबको लगती है
भूख को भुनाने में लगे हैं उन्हें भी
और भूख को हराने में लगे हैं उन्हें भी
भूख मिटती नहीं
भूख हारती नहीं
पर भूख को हराने का हौसला कहती है
हारेगी भूख कभी न कभी।
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कुबेर

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