शनिवार, 17 जनवरी 2026

समीक्षा - साहित्य अउ लोकभाषा के संगम छत्तीसगढ़ी में मैक्सिम गोर्की के ‘बाज के गीत अउ दूसर कहानी’ - डुमन लाल ध्रुव छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रकाशित कहानी-संग्रह ‘बाज के गीत अउ दूसर कहानी’ केवल एक अनूदित पुस्तक नहीं है यह विश्व साहित्य और लोकभाषा के बीच बना एक सशक्त सांस्कृतिक सेतु है। यह संग्रह महान रूसी लेखक मैक्सिम गोर्की की चुनिंदा कहानियों का छत्तीसगढ़ी अनुवाद है जिसे अनुवादक श्री कुबेर सिंह साहू जी ने अत्यंत निष्ठा, संवेदना और साहित्यिक समझ के साथ प्रस्तुत किया है। मानसी पब्लिकेशंस दिल्ली से प्रकाशित यह पुस्तक छत्तीसगढ़ी साहित्य को वैश्विक विचारधारा से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बनकर सामने आती है। मैक्सिम गोर्की का साहित्य मानवीय संघर्ष, सामाजिक यथार्थ, श्रमिक चेतना औरतों क्रांतिकारी विचारों का साहित्य है। वे उन लेखकों में हैं जिन्होंने साहित्य को केवल सौंदर्य की वस्तु न मानकर सामाजिक परिवर्तन का औजार बनाया। गोर्की की कहानियों में हाशिए का मनुष्य केंद्र में होता है वह मनुष्य जो गरीबी, शोषण, अपमान और अकेलेपन के बीच भी अपने भीतर गरिमा और प्रतिरोध की लौ जलाए रखता है। ऐसे लेखक की रचनाओं का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद इस अर्थ में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि छत्तीसगढ़ स्वयं श्रमिक, किसान और वंचित समुदायों की भूमि रहा है। गोर्की की चेतना यहां सहज रूप से अपनी जमीन पहचान लेती है। इस संग्रह में कुल तेरह कहानियां शामिल हैं—‘पतझड़ के एक रात’, ‘बाज के गीत’, ‘कामरेड’, ‘छब्बीस मरद अउ एक लड़की’, ‘एक गद्दार के मों’, ‘वेल्काश’, ‘वोकर मयारुक’, ‘इजरगिल डोकरी’, ‘वो नन्हा बालक’, ‘वो नन्हा गौरैया’, ‘सूरज अउ समुंदर’, ‘हड़ताल’ और ‘तूफानी पितरेल के गीत’। ये कहानियां विषय, शिल्प और संवेदना के स्तर पर एक-दूसरे से भिन्न होते हुए भी मनुष्य और समाज के मूल प्रश्नों पर एक साझा दृष्टि प्रस्तुत करती हैं। संग्रह का क्रम ऐसा है कि पाठक व्यक्तिगत पीड़ा से सामाजिक चेतना और फिर क्रांतिकारी स्वर तक की एक वैचारिक यात्रा करता है। ‘बाज के गीत’ इस संग्रह की केंद्रीय और प्रतीकात्मक कहानी है। बाज यहां स्वतंत्रता, साहस और विद्रोह का प्रतीक बनकर उभरता है। छत्तीसगढ़ी अनुवाद में बाज की उड़ान और उसकी चुनौतीपूर्ण आवाज अत्यंत प्रभावशाली हो उठती है। यह कहानी पाठक के भीतर दबी हुई स्वतंत्रता की आकांक्षा को झकझोरती है। ‘कामरेड’ और ‘हड़ताल’ जैसी कहानियां श्रमिक एकता, वर्ग-चेतना और सामूहिक संघर्ष की भावना को मुखर रूप देती हैं। छत्तीसगढ़ जैसे श्रमप्रधान समाज में ये कथाएं केवल साहित्य नहीं रह जाती बल्कि सामाजिक अनुभव का विस्तार बन जाती है। ‘वेल्काश’ संग्रह की सबसे लंबी और गहरी कहानियों में से एक है। यह कहानी मनुष्य के भीतर छिपे दर्द, स्मृति और टूटन की मार्मिक अभिव्यक्ति है। वेल्काश का जीवन, उसकी असफलताएं और उसकी आत्मिक पीड़ा छत्तीसगढ़ी भाषा में अत्यंत आत्मीय रूप ले लेती है। पाठक को यह महसूस नहीं होता कि वह किसी दूर देश की कथा पढ़ रहा है बल्कि वह उसे अपने आसपास का, अपने समाज का ही एक चेहरा लगती है। इसी प्रकार ‘इजरगिल डोकरी’ में गोर्की का दार्शनिक और प्रतीकात्मक स्वर उभरता है। प्रेम, बलिदान और अहंकार की यह कथा छत्तीसगढ़ी अनुवाद में लोककथा सी प्रवाहशील और प्रभावी हो गई है। संग्रह की बाल और प्रकृति केंद्रित कहानियां ‘वो नन्हा बालक’, ‘वो नन्हा गौरैया’ और ‘सूरज अउ समुंदर’ पुस्तक को भावनात्मक संतुलन प्रदान करती हैं। इन कहानियों में मासूमियत, करुणा और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टि दिखाई देती है। छत्तीसगढ़ी भाषा की कोमलता इन कथाओं में विशेष रूप से उभरती है और यह सिद्ध करती है कि यह भाषा केवल संघर्ष और आक्रोश ही नहीं स्नेह और सौंदर्य को व्यक्त करने में भी सक्षम है। अनुवाद की दृष्टि से यह संग्रह अत्यंत सराहनीय है। श्री कुबेर सिंह साहू जी ने शब्दानुवाद के बजाय भावानुवाद को प्राथमिकता दी है। उन्होंने रूसी परिवेश को बनाए रखते हुए भी भाषा को इतना सहज और आत्मीय बनाया है कि पाठक को किसी प्रकार का भाषिक बोझ महसूस नहीं होता। संवाद स्वाभाविक है वर्णन चित्रात्मक है और पूरी पुस्तक में छत्तीसगढ़ी की लोकलय बनी रहती है। यह अनुवाद पढ़ते हुए ऐसा लगता है मानो गोर्की स्वयं छत्तीसगढ़ी में बोल रहे हों। मानसी पब्लिकेशंस दिल्ली द्वारा किया गया प्रकाशन भी प्रशंसनीय है। पुस्तक की प्रस्तुति, मुद्रण और संपादन संतोषजनक है। यह संग्रह केवल साहित्य प्रेमियों के लिए ही नहीं छात्रों, शोधार्थियों और अनुवाद अध्ययन से जुड़े पाठकों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। समग्र रूप से देखा जाए तो ‘बाज के गीत अउ दूसर कहानी’ छत्तीसगढ़ी साहित्य में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। यह पुस्तक सिद्ध करती है कि छत्तीसगढ़ी भाषा में विश्व साहित्य को पूरी वैचारिक गहराई और कलात्मक गरिमा के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। यह संग्रह रूसी क्रांतिकारी चेतना और छत्तीसगढ़ की लोकसंवेदना के बीच एक जीवंत संवाद स्थापित करता है। श्री कुबेर सिंह साहू जी का यह अनुवाद कार्य निस्संदेह अद्भुत है और छत्तीसगढ़ी साहित्य के इतिहास में इसे एक मील का पत्थर माना जाएगा। - डुमन लाल ध्रुव मुजगहन, धमतरी (छ. ग.) पिन - 493773 मोबाइल - 9424210208

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