रविवार, 28 अप्रैल 2019

अनुवाद

उंघासी - अंतोन चेखव

(अनुवाद हिंदी ले छत्तीसगढ़ी म। - कुबेर)

रात के बेरा रिहिस। एक ठन खोली म एक झन तेरा साल के नानचुक नोनी, वारिका ह एक ठन झूलना ल डोलावत बइठे रहय। अउ मद्धिम आवाज म लोरी गुनगुनावत रहय, ’’आ जा रे निंदिया, आ जा, आ के मोर मुन्ना ल सुता जा।’’ 

वो खोली के एक कोन्टा म कोनों देवता के एक ठन फोटू टंगाय रहय, जेकर आगू म हरियर अंजोरवाला एक ठन बत्ती जलत रहय। खोली के एक कोन्टा ले दूसर कोन्टा तक एक डोरी बंधाय रहय जउन म बच्चा के पोतड़ा अउ करिया रंग के एक ठन लंबा पैजामा टंगाय रहय। खोली के छत म हरियर अंजोर के बड़े गोल चकता कस धब्बा परत रहय। डोरी म टंगाय पोतड़ा अउ लंबा पैजामा के लंबा-लंबा छंइहा मन खोली के आतिसदान म, झूलना म अउ वारिका के ऊपर परत रहय। बत्ती के लौ ह जब अचानक फड़फड़ाय तब छत के वो हरियर धबा ह अउ खोली म पोतड़ामन के बनल छंइहा मन ह अइसे फड़फड़ाय लगे मानों बहुत तेज हवा चलत होय अउ जेकर ले वोमन ह डोलत होय। खोली म दम घुटत रहय अउ उहाँ गोभी के सुरवा अउ जुन्ना पनही के बास, जइसे कि पनही के दुकान मन म आथे, आवत रहय। बच्चा ह रोवत रहय अउ रो-रो के वोकर नरी ह बइठ गे रहय। रो-रो के बच्चा ह थक गे रहय तभू ले वो ह सरलग रोतेच् रहय। पता नहीं वो ह कब चुप होही? 

वारिका के पलक मन ह नींद के मारे भारी हो गे रहय अउ आँखी ह नींद के मारे मुंदाय परे। वारिका ह अपन आँखीं मन ल उघारे के कोसिस करय तभू ले वोकर आँखीं मन मुंदइच् जावय। वोकर नरी ह रहि-रहिके ओरम जावय। वोकर नरी म पीरा भर गे रहय। वोकर चेहरा ह सुखा के कठवा कस दिखत रहय। न तो वोकर ओंठमन ह खुलय अउ न वोकर आँखीं मन ह खुलय। तभोे ले वो ह नींद म गुनगुनवात रहय, ’’आ जा रे निंदिया, आ जा, आ के मोर मुन्ना ल सुता जा, तोर बर मंय ह हलुवा पकाहूँ .....।’’ 

आतिसदान डहर ले एक ठन झिंगरा के नरियाय के करकस आवाज आवत रहय। बगलवाले खोली डहर ले वोकर मालिक-मालकिन अउ इहाँ रहिके काम सिखइया अफानासी के खर्राटा के आवाज आवत रहय। झुलना ह अइसे चरमरात रहय कि मानो वहू ह झूलत-झूलत असकटा गे होय अउ अब झूले से इनकार करत होय। वारिका के सरीर म झुरझुरी भर गे रहय। सब मिला के अइसे लगत रहय कि रात के रानी ह संसार भर के परानी मन ल सुताय खातिर लोरी गावत होय कि जेला सुन के कोनों ल घला ढलंगते भार नींद आ जाय। पन लोरी के ये धुन ह वारिका के मन म कंझावट पैदा करत रिहिस काबर कि वोला सुनके वहू ल नींद आवत हे, जबकि वोला सुतना मना हे। मालिक नइ ते मालकिन ह वोला सुतत देखही त वोकर जोरदार पिटाई हो जाही। 

बत्ती के लौ ह अचानक फड़फड़ाय लगिस। छत के गोल, हरिय बुंदका ह घला फड़फड़ाय लागिस। पोतड़ा अउ पैजामा के छंइहाँ मन ह वोकर अधखुल्ला आँखीं मन म नाचे लागिस। उंघास ले भरे वोकर  दिमाग म नाना परकार के सपना झलके लगिस। सपना म वोला अगास म बादलमन ह जोर-जोर से दंउड़त, चीखत-चिल्लावत, एक-दूसर के पीछू भागत लइकामन के समान दिखे लगिस। तभे हवा चले लगिस अउ बादलमन ह गायब हो गिन। 

सपना ह बदल जाथे। अब वो ह खूब लंबा-चैड़ा सड़क देखत हे। सड़क म सबो कोती चिखलच् चिखला हे। टांगा अउ बघ्घी के रेला लगे हे। खूब भीड़ हे। मनखेमन के रेला लगे हे। लोगन अपन पीठ म गठरी अउ झोला लादे आवत-जावत हें। चारों डहर धुंधरा बगरे हे अउ धुंधरा म मनखेमन ह छंइहाँ बरोबर दिखत हें। सड़क के आजूबाजू घनघोर जंगल हे। अचानक मनखेमन के भीड़ ह अउ अपन पीठ म झोला अउ गठरी लादे मनखे मन ह अपन-अपन बोझा अउ गठरी सहित चिखला म फिसल-फिसल के गिरे लगथें। वारिका ह वोमन ले पूछथे, ’’तूमन ये का करत हव?’’

वोमन कहिथें, ’’हमला नींद आवत हे अउ हमन सुते बर ढलंगत  हन।’’ ये कहिके वोमन सुत जाथें। सड़क के दूनो बाजू लगे बिजली अउ टेलीफोन के तारमन म गजब अकन कँउआ अउ नीलकंठ बइठे काँव-काँव, चाँव-चाँव करत हें अउ सुतइया मनखेमन ल सुतन नइ देवत हें। वारिका ह फेर बुदबुदाय लगथे, ’’आ जा रे निंदिया, आ जा, आ के मोर मुन्ना ल सुता जा, तोर बर मंय ह हलवा पकाहूँ .....।’’

अब वो ह दूसर सपना देखे लागथे। वो ह एकठन बंद अउ अंधियारी खोली म बइठग हे। वोकर मरे बाप येफिम स्पितनाक ह खोली म भुँइया म परे तलफत हे। वो ह वोला दिखत भले नइ हे फेर वोकर आवाज ह सुनाई देवत हे। वोकर छटपटई के आवाज ह घला वोला सुनावत हे। बाप ह वोला बताय रिहिस कि वोकर पेट के फोरा ह फुट गे हे अउ वोकर पेट म भयानक दरद होवत हे। दरद के मारे वोकर बाप ह बोल नइ सकत हे, खाली हफरत हे अउ दांत ल कटकटावत हे, तबला बाजे कस - कट कट कट। वोकर माँ पिलागेया ह दंउड़त-दंउड़त मालिक घर गे हे, ये बतायबर कि वोकर पति ह मरत हे। माँ ल गेय बहुत समय हो गे हे अउ अब तक वोला लहुट के आ जाना रिहिस। वारिका ह अंगीठी तीर ढलंगे हे अउ अपन माँ के रद्दा देखत हे। बाप के दांत कटकटाय के आवाज ह वोला साफ-साफ सुनावत हे। तभे वोकर झोपड़ी तीर एक ठन घोड़ा गाड़ी ह आके खड़ा होइस। घोड़ा गाड़ी ले एक झन आदमी उतरिस। ये ह विही डाक्टर हरे जउन ह वोकर मालिक घर कोनों मरीज के इलाज करे बर सहर ले आय हे। डाक्टर ह झोपड़ी के दुवारी ल ढकेल के भीतर आइस। घुप्प अंधियार रिहिस। हाथ ल हाथ ह नइ दिखत रहय फेर डक्टर के खाँसी अउ दरवाजा के चरमराय के आवाज ले पता चलिस।

’’मोमबत्ती जलाव।’’ डाक्टर ह किहिस।

’’वा.. वा..  ।’’ येफिम ह बुदबुदा के कुछू केहे के कोसिस करिस। पिलागेया ह दंउड़त-दंउड़त अंगीठी तीर के आंट तीर गिस अउ माचिस ल खोजे के कोसिस करिस। छिन भर चुप्पी छाये रिहिस फेर डाक्टर ह अपन जेब ल माचिस निकाल के जलाइस। 

’’एक मिनट साहब, बस एक मिनट।’’ पिलागेया ह चिचोरी करिस अउ दंड़त झोपड़ी ले निकल गिस अउ तुरत मोमबत्ती के एकठन टुकड़ा धर के लहुट गिस। येफिम के गाल ह लाल हो गे रहय अउ वोकर आँखीं मन ह अइसे चमकत रहय मानो वो ह डाक्टर ल पहिचान डरिस होही। वोकर निगाह मन अइसे ताकत रहंय जइसे वो ह डाक्टर अउ झोपड़ी के वो पार कोनों रहस्यमय जिनिस देख लिस होही।

’’का हो हे, तोला का हो गे हे?’’ डाक्टर ह येफिम ले पूछिस, ’’ओह, बहुत दरद होवत हे क? अबड़ दिन के बीमार हस क?’’

’’मरत हंव सरकार, मोर दिन पूर गे हे। अब तो मरहूँ तभे आराम मिलही।’’ येफिम ह किहिस।

’’अरे! बेवकूफ जइसे बात झन कर। मंय ह तोला बने कर दुहूँ।’’

’’जइसे आपके मरजी सरकार। आपके मेहरबानी होही। वइसे मंय ह जानथंव सरकार, आवल मौत ल कोनों ह नइ रोक सकय।’’

डाक्टर ह पंदरा मिनट ले येफिम के बीमारी के जांच करिस अउ सोझ खड़े हो गिस। पल भर ठहर के किहिस, ’’अब मंय ह कुछू नइ कर सकंव। तोला अस्पताल जाय बर परही। उहाँ डाक्टरमन ह तोर आपरेसन करहीं। तुरंत के तुरंत तोला जाय बर परही। बहुत देर कर डारे हस। घबर झनी। तुरंत, अभीचे तंय ह अस्पताल चले जा।’’
’’पन कइसे सरकार? हमर कना कोनों साधन नइ हे।’’ पिलागेया ह किहिस।

’’तंय फिकर झन कर। मंय ह अभी तुंहर मालिक ल जा के कहत हंव। वे ह घोड़ा भेज दिही।’’ कहत-कहत डाक्टर ह झोपड़ी ले निकल गिस।

पिलागेया ह मोमबत्ती ल बुझा दिस। येफिम ह दांत ल फेर किटकिटाय लगिस। तकरीबन आधा घंटा बाद दुवारी म एक ठन टांगा के आवाज आइस। येला येफिम ल अस्पताल लेगे बर वोकर मालिक ह भेजवाय रिहिस। येफिम ह तियार हो के तुरते गाड़ी म बइठ गिस।

बिहान हो गिस। पिलागेया ह घर म नइ दिखिस। वो ह अपन पति ल देखे बर अस्पताल चल देय रिहिस। 

कहुँचो एक झन बच्चा ह रोवत रिहिस अउ वारिका ल अपने आवज म लोरी सुनात रिहिस, ’’आ जा रे निंदिया, आ जा, आ के मोर मुन्ना ल सुता जा, .....।’’

थोरिक देर म वोकर माँ, पिलागेया ह लहुट के आ गिस। वो ह रहिरहि के अपन छाती म सलीब के निसान बनाके कहत रहय, ’’रातकुन तो सब बने-बने रिहिस। डाक्टरमन ह वोला बने कर देय रिहिन। फेर बिहिनिया होवत-होवत वोकर आत्मा ह भगवान घर चल दिस। भगवान ह वोकर आत्मा ल सांति देय। डाक्टरमन कहत रिहिन, अबड़ देरी करेव। तुम्हला बहुत पहिली आ जाना रिहिस।’’ 

ये सुन के वारिका ह झोपड़ी ले निकल गिस अउ रोय लगिस। 

विही समय वोकर चेथी ल कोनों ह जोरदार मारिस। वारिका ह भोजपत्र के पेड़ म जा के टकरा गिस अउ वोकर आँखींमन ह उघर गिन। वोकर सपना ह टूट गिस। वो ह आँखी उठा के देखिस, आगू म वोकर मालिक मोची ह खड़े रहय अउ वोला बखानत रहय, ’’का करत हस रे झिथरी, बेसरम, लइका ह रोवत हे अउ तंय ह नींद भांजत हस।’’ वो ह वोकर चेथी म फेर जोरदार चांटा मारिस।

वारिका ह झकनका के अपन मुड़ी ल झटकारिस अउ फेर लोरी गाय लगिस, ’’आ जा रे निंदिया, आ जा, आ के मोर मुन्ना ल सुता जा, तोर बर मंय ह हलुवा पकाहूँ .....।’’
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पलभर बीतिस होही, छत के हरियर, गोल धब्बा ह फेर झिलमिलाय लगिस; बच्चा के पोतड़ा अउ पैजामा के लंबा-लंबरा छँइहाँ मन ह फेर डोले लगिन। वारिका के आँखींमन ह फेर मुंदाय लगिन। नींद ह वोला फेर चमचम ले गरस लिस अउ वो ह फेर पहिलीवाला सपनामन ल देखे लगिस। विही चिखला म लतपथ सड़क अउ पीठ म झोला अउ गठरी लादे मनखे जउनमन अपन बोझा ल फेंक के सड़क म घोलंड-घोलंड के सुतत हें, वोला फेर दिखे लगिस। वोमन ल सुतत देख के वहू ल नींद आय लगिस। वो ह नींदभर सुतना चाहथे फेर वोकर माँ पिलागेया ह वोकर संग रेंगत हे अउ वोला जल्दी-जल्दी रेंगे बर झंझेटत हे। दुनों झन भीख मांगे बर सहर कोती जावत हें। सड़क रेंगइया मनखे मन के आगू हाथ लमा-लमा के वोकर माँ ह कहत हे, ’’यीशु के नाम म कुछू दे देव भइया हो। खुदा तुमला बरकत दिही, तुमला दुनिया भर के सुख दिही। गरीब के मदद करो भइया।’’

’’लइका ल एती लान, एती लान।’’ वोला जाने-पहिचाने आवाज सुनाइस। ’’लइका ल धर के एती आ,,। नइ सुनावत हे क?’’ विही आवाज ह वोला फेर सुनाई दिस। आवज म गुस्सा भरे हे। ’’हरामी, तंय ह सुतत हस।’’ 

वारिका ह डर के मारे कांपे लगिस। वो हर घूम के चारों मुड़ा देखिस अउ अनुमान लगाय के कोसिस करिस कि आखिर का हो गे, ये आवाज ह आवत कोन डहर ले हे। वोला वो सड़क, सड़क म सुतइया मनखे अउ वोकर माँ पिलागेया ह दिखना बंद हो गे। उहाँ तो सिरिफ वोकर मालकिन ह खड़े हे जउन ह लइका ल दूध पियाय बर आय हे। 

जतका देर ले भइसी सरिख वोकर मालकिन ह लइका ल दूध पियावत रिहिस, वो ह चुपचाप, नरी गड़ियाय खड़े रिहिस।

खिड़की के बाहिर दिन के नवा उजास बगरे लग गे हे। खोली म हिलत छँइहामन ह घुमलातत हें अउ छत के ऊपर के गोल हरियर घब्बा ह पींवरा परत जात हे। अब बहुत जल्दी बिहिनिया होनेवाला हे।

’’ले, लइका ल धर।’’ अपन बलाउज के बटनमन लगावत वोकर मालकिन ह किहिस, ’’ये हर अभी रोवत हे, येला कइसनो करके मना अउ सुता।’’ 

वारिका ह लइका ल अपन गोदी म पा लिस अउ वोला झुलना म सुता के झुलना ल डोलाय लहिस। छत के हरियर धब्बा अउ खोली के छंइहा मन ह अब पूरा-पूरा दिखना बंद हो गे। खोली म अब वोला नींद म जकड़नेवाला कोनों जिनिस नइ नजर आवत हे। तभो ले वारिका के आँखींमन ह मुंदाय परत हे। वो ह कइसनों करके सुतना चाहत हे। वो ह झुलना के पीछू डहर वोकर एक कोर म आपन मुड़ी ल टेका के अपन हाथ-गोड़ ल हला के नींद ल भगाय के कोसिस करे लगिस। खड़े हो के अँटियाइस। तहू ले वोकर आँखींमन ह मुंदायेच् परे। वोकर माथ ह तको पिराय लगिस। 

’’वारिका, चल चूल्हा बार।’’ अचानक मालिक के आवाज सुनइस। ’’अब उठे अउ काम करे के बेरा हो गे हे।’’
वारिका ह झूलना तीर ले उठिस अउ घर के पिछवाड़ा म बने लकड़ी टाल कोती भागिस। अब वो ह प्रसन्न हे काबर कि एक जघा बइठे रहय म नीद ह सताते अउ एती-ओती दंउठे-भागे अउ काम करे म नइ सताय। वो ह लकड़ी लान के चूल्हा सिपचाय लगिस। वोला अइसे जनाइस कि रातकुन वोकर मुँहू-कान ह कठवा सरीख हो गे रिहिस हे अउ अब वो मन ह फेर हरिया गे हे, मुुलायम हो गे हे अउ नींद ह भाग गे हे। 

’’वारिका, समोवार ल साफ कर दे।’’ मालकिन के आदेस सुनाई दिस। वो ह एकदम गुस्सा म हे।

अभी वारिका ह समोवार के सफाई करतेच् रिहिस कि दूसरा हुकुम मिल गे, ’’वारिका, मालिक के गमबूटमन ल साफ कर दे।’’

वारिका ह जमीन म बइठ के गमबूटमन ल पोंछे लगथे। गमबूटमन ल पोंछत-पोंछत वो ह सोचे लगथे, ’कतका अच्छा होतिस कि वो ह ये गमबूट म खुसर के ढलंग जातिस अउ नींदभर सुत लेतिस।’ अउ गमबूट ह धीरे-धीरे फूले़े लगिस अउ फूलत-फूल़त वो ह खोलीभर म पसर गिस अउ बिछौना म बदल गिस। अब खोली भर म बिछौना बिछे हे। बूट ल साफ करे के बुरुस ह वोकर हाथ ले छूट के गिर गिस। 

वो ह फेर सचेत हो गिस। आँखी ल उघार के चारों मुड़ा देखे लगिस। कोनों चीज ह वोला साफ-साफ दिखत नइ हे, सब एती-वोती घूमत हें। वो ह जिनिसमन ल साफ-साफ देखे के कोसिस करे लगिस।

’’वारिका, बाहिर सिढ़ियामन ह कतका गंदा हो गे हे, धो के जरा साफ तो कर दे। अतका गंदा सीढ़ियामन ल नहक के दुकान जाय म मोला सरम आथे।’’ मालिक ह आदेस दिस।

वारिका ह सीढ़ियामन ल धो के पोंछे लगिस। दुकान म जा के वोला बहरे लगिस अउ काम खतम करके घर कोती आ गिस। 

अभी वोला बहुत सारा काम करना हे। काम के मारे वोला पलभर के फुरसत नइ हे। फेर येला छोड़ के वो ह जाय तो जाय कहाँ। दूसर काम ह अतका आसान नइ हे जतका घर के काम ह आसान होथे। वो ह रसोई खोली म आ के आलू छिले बर बइठ गिस। आलू छीलत-छीलत वोकर नरी ह फेर ओरम गिस। नींद के मारे आँखीं मन ह फेर मुंदाय लगिस। वोकर नजर म आलूच् आलू झूले लगिस। चाकू ह छूट के गिर गिस। फेर वोकर कान ह बाजत हे। 
कुछू न कुछू बड़बड़ावत अउ अपन गाऊन के आस्तीन ल ऊपर चघा के, रखोईखोली म चक्कर लगावत, मालकिन के आवाज ह सुनावत हे। सब के नास्ता-पानी हो चुके हेे अउ मंझनिया के खाना बनाय के तइयारी हो गे हे। घर के साफ-सफाई के काम घला निबट गे हे अउ कपड़ामन ल धोय के दुखदायी काम ह चलत हे। वारिका ल सुतना हे, कुछू काम नहीं, खाली सुतना हे। काम करत-करत वोकर इच्छा होथे कि सब कामधाम ल छोड़के वोहा भुंइया म ढलंग जाय।

धीरे-धीरे दिन बीत जाथे अउ खिड़कीमन कोती ले सांझ के मुंधियारी ह आ-आके घर म समाय लगथे। वारिका ह अपन कनपटीमन ल मसक के देखथे। अइसे जनाथे कि वोकर सरीर ह सुखा के कठवा हो गे हे। अचानक खिड़की ह खुल जाथे। बाहिर म चारों डहर अंधियार बगर चुके हे। अंधियार ह वोला अबड़ सुहाथे काबर कि वोमा वोकर आँखींमन ल आराम मिलथे। सोचथे कि वोला अब जल्दी सुते बर मिल जाही। 

फेर सुतना वोकर किस्मत म नइ हे। घर म सगा आ गिन हें अउ मालकिन ह चिलवत हे, ’’वारिका, समोवार तइयार कर।’’ उंकर समोवार ह छोटकुन हे। सगामन के चहा-पानी खतम होय के पहिली वोला पाँच घांव ले पानी गरम करना परिस हे। 

चहा खतम होय के बाद वारिका ल फेर आदेस मिल गे, ’’वारिका, भागत जा अउ तीन बोतल बीयर खरीद के लान।’’ वारिका ह पइसा धर के बीयर दुकान कोती भागिस। वो एकदम पल्ला भागे के कोसिस करथे। भगई ह वोला बने लगथे। भागे म वोला नींद नइ आय। वो ह सरलग भागत रहना चाहथे जेकर ले नींद ह वोला सता मत सके। वोला रहि-रहि के आदेस मिलत हे, ’’वारिका, जा तो वोद्का के बोतल खरीद के लान। वारिका, बोतल खोले के सूजा कहाँ हे, लान तो।’’

आखिरकार सगामन चलेगिन। घर के सबो बत्तीमन ल बुझा दे गिस। मालिक अउ मालकिन, दुनोंझन सुतेबर अपन खोली म चलदिन। मालकिन ह जावत-जावत लइका ल वारिका ल धरा के किहिस, ’’ले धर, येला रोवन झन देबे। झुलना ल बराबर झुलावत रहिबे, ताकि वोकर नीद परे रहय।’’

आतिसदान म बइठे झींगुर फेर झनझनाय लगिस। देवता के फोटू के आगू जलत बत्ती ह फेर फड़फड़ाय लगिस। छत के ऊपर पड़नेवाला हरियर गोल धब्बा अउ डेरी म टंगाय पोतड़ा अउ पैजामामन के छंइहाँमन फेर वोकर आँखीं-आँखीं म डोले लगिन। नींद म वोकर आँखीं मन ह करुवा गे हे। वोकर दिमाग ह घूमत हे। नींद ह आ के वोला फेर जकड़े के कोसिस करत हे। वोकर होठ मन ह हालत हे अउ आवाज आवत हे, ’’’’आ जा रे निंदिया, आ जा, आ के मोर मुन्ना ल सुता जा, तोर बर मंय ह हलुवा पकाहूँ .....।’’

थोरिक देर बाद लइका ह फेर रोय लगिस। वोकर रोवई ह जारी हे अउ वो ह रोवत-रोवत थक गिस। वारिका के आँखींमन म कालीवाला सपनामन अउ दिखे लगिन। एकठन सड़क हे। सड़क ह चिखला ले भरे हे। बोझा अउ गठरी धर के रेंगइया मनखेमन ह अपन-अपन बोझा अउ गठरीमन ल फेंक के सड़क म ढलंगे हे। सबझन खर्राटा भरत हे। माँ पिलागेया अउ बाप फेहिम ह फेर वोकर आँखींमन म झूले लगिन। वारिका ह ये सबमन ल देखत हे, सबमन ल पहिचानत हे फेर वो ह अतका नींद म हे कि वोकर हाँथ-गोड़ ह काम नइ करत हे। 

ये नींद ह वोला जीयन नइ देवत हे। वारिका ह चारों मुड़ा नजर घुमा के देखत हे अउ अइसे चीज खोजत हे जउन ह वोला जीयेबर सहायता करे, जीये बर वोला ताकत देय। वोकर अंग-अंग ह थकान के मारे टूटे परत हे। वो ह जागे के भरपूर कोसिस करत हे। झत के गोल हरियर धब्बा ह फेर वोकर दिमाग म घूमे लगथे। लइका ह सरलग रोये जावत हे। वोला लगिस कि लइकच् ह वोकर असली दुस्मन हरे। लइकच् ह वोला जीये बर नइ देवत हे।

वोकर असली दुस्मन कोन हरे ये ह अब वोला समझ म आ गे हे। वोला हँसी आ गिस। अतका नानचुक बात ह वोला काबर समझ में नइ आवत रिहिस? वोकर ये समझ ऊपर, आसिदान म बइठे झींगरा, छत के गोल, हरियर धब्बा अउ पोतड़ा अउ पैजामा के छंइहाँमन ल घला अचरज होय लगिस। वोकर असली दुस्मन लइकच् ह हरे, ये खतरनाक विचार ह वोकर दिमाग म आ के बस गे हे। 

वो ह स्टूल ले चुपचाप उठिस अउ मुसकाय लगिस। वोकर चेहरा ह खुसी के मारे चमके लगिस। थोरिक देर वो ह खोली म एती-वोती चक्कर काटिस। वोला लगिस कि वोकर परेसानी के हल वोला मिल गे हे अउ अब वो ह ये झंझट ले छुटकारा पा सकथे जउन ह वोकर हाथ-गोड़ बांध के रखे हे। वो ह लइका गे टोंटा ल मसक देही अउ वोला ये बंधना ले छुटकारा मिल जाही। न बांस रही अउ न बांसुरी बजही। वो ह ऊपर डहर छत के गोल हरियर धब्बा कोती देख के कुछू किहिस अउ हाँसत-हाँसत लइका के टोंटा ल अपन दुनों हाथ के मुट्ठी म कंस के पकड़ लिस।

अउ जल्दी से आ के वो ह भुंइया म ढलंग गिस। वो ह मनेमन हाँसत हे। एकदम खुस हे कि अब वो ह आराम से नींदभर सुत सकथे। जल्दी वोकर आँखींमन म नींद ह आ के समा गिस अउ वो ह मुरदामन कस आराम से सुत गिस।
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